बलि का बकरा’ बना रोजगार सेवक: कमीशन की मलाई ऊपर तक, गाज गिरी तो सब हुए रफूचक्कर!*

6
Advertisement

*

रिपोर्ट:गजेन्द्र गुप्त

महराजगंज (सिसवा): कहते हैं कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें पाताल तक होती हैं, लेकिन जब कुल्हाड़ी चलती है, तो सबसे पहले वह हिस्सा कटता है जो जमीन के सबसे करीब हो।विकास खंड सिसवा के ग्राम सभा शिकारपुर में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। रोजगार सेवक बलजीत खरवार पर ‘सेवा समाप्ति’ की तलवार लटक रही है, लेकिन इस पूरी पटकथा के असली विलेन पर्दे के पीछे मलाई चाटकर खामोश बैठे हैं।

*कमीशन का गणित: ‘आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया’।*
एक रोजगार सेवक का मानदेय मात्र लगभग 10 हजार रुपये है। अब जरा सिस्टम का तमाशा देखिए—ब्लॉक की दौड़, ऑफिस का ‘चाय-पानी’ और फाइलें सरकाने का खर्च मिलाकर महीने का 8 से 10 हजार तो खर्च ही हो जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या रोजगार सेवक केवल समाज सेवा के लिए भूखा पेट काम करेगा? यहीं से शुरू होता है 5 से 10% के कमीशन और ‘फर्जीवाड़े’ का वह खेल, जिसका रिमोट कंट्रोल ऊपर बैठे दिग्गजों के हाथ में होता है।

यहां भी पढ़े:  सेवानिवृत्ति होमगार्डो को दी गई भावभीनी विदाई

*प्रधान की धमकी और सिस्टम का दबाव।*
सूत्रों की मानें तो एक रोजगार सेवक चाहकर भी ईमानदार नहीं रह सकता। अगर वह नियम का पाठ पढ़ाए, तो ग्राम प्रधान की ओर से ‘सेवा समाप्ति’ की धमकी मिलने लगती है। मनरेगा के कार्यों में होने वाले फर्जीवाड़े से नीचे से लेकर ऊपर तक सबकी जेबें गर्म होती हैं। जब तक सब ठीक रहता है, रोजगार सेवक सबका ‘खास’ होता है, लेकिन जैसे ही जांच की आंच आती है, बड़े अधिकारी और रसूखदार नेता पल्ला झाड़ लेते हैं।

यहां भी पढ़े:  वार्ड क्रमांक 56 गोरेगाँव वेस्ट लक्ष्मी भाटिया शिवसेना (UBT)गुट ने जीता चुनाव

*जांच के घेरे में ‘छोटा कर्मचारी’ ही क्यों?*
शिकारपुर के मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सिस्टम में ‘मलाई’ खाने वाले सुरक्षित हैं और ‘मजदूरी’ करने वाला बलि का बकरा बनाया जा रहा है। बलजीत खरवार की सेवा समाप्ति की चर्चाओं के बीच अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या फर्जीवाड़े का पैसा सिर्फ रोजगार सेवक की जेब में गया क्या ऊपर बैठे अधिकारियों को इस ‘कमीशन तंत्र’ की भनक नहीं थी जब जेबें सबकी भरी गईं, तो सजा अकेले रोजगार सेवक को क्यों?
> कड़वा सच: “मलाई खा गए मस्ताने, और फंस गए बेचारे अनजाने।” रोजगार सेवक की स्थिति उस मोहरे जैसी हो गई है जिसे शतरंज की बाजी बचाने के लिए सबसे पहले कुर्बान कर दिया जाता है।

यहां भी पढ़े:  थाना कोतवाली उतरौला पुलिस द्वारा टुल्लू पम्प चोरी करने वाला अभियुक्त गिरफ्तार*

अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन केवल ‘छोटे प्यादे’ को मारकर अपनी पीठ थपथपाएगा या उस ‘सिस्टम’ पर भी वार करेगा जो ईमानदारी को खुदकुशी करने पर मजबूर कर देता है।

Advertisement