महाभ्रष्टाचार: निचलौल में मनरेगा बनी ‘लूट की पाठशाला’, बैसाखी के सहारे चलने वाला मजदूर कागजों में खोद रहा मिट्टी!*

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*रोजगार सेवक नीलरतन पटेल का कारनामा: रामचंद्रही में दिव्यांग छोटेलाल को फोटो खिंचवाने के लिए किया जाता है मजबूर।*

रिपोर्ट:कार्यालय ब्यूरो।

निचलौल (महराजगंज)। जनपद में मनरेगा भ्रष्टाचार का पर्याय बनती जा रही है। विकास खंड निचलौल के ग्राम सभा रामचंद्रही से एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है, जिसने व्यवस्था की शुचिता और अधिकारियों के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। यहाँ एक ऐसे व्यक्ति को मस्टर रोल में मजदूर दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है, जो खुद बैसाखी के बिना दो कदम चलने में भी असमर्थ है। ग्राम सभा रामचंद्रही निवासी छोटेलाल पुत्र महेश भारती (जॉब कार्ड संख्या- 1022) शारीरिक रूप से पूरी तरह अक्षम हैं। अपनी नित्यक्रिया के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहने वाले छोटेलाल ने कभी काम की मांग (डिमांड) नहीं की, लेकिन ‘सृजनहार’ बने रोजगार सेवक नीलरतन पटेल ने उन्हें फाइलों में ‘कर्मठ मजदूर’ बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक, रोजगार सेवक द्वारा इस दिव्यांग व्यक्ति को केवल मस्टर रोल के लिए फोटो खिंचवाने हेतु कार्यस्थल पर आने के लिए मजबूर किया जाता है, ताकि फर्जी हाजिरी को असली रूप दिया जा सके।चर्चा है कि रोजगार सेवक नीलरतन पटेल काम कराने (या कहें कि कागजों को मैनेज करने) में इतने ‘महारथी’ हैं कि वे एक नहीं, बल्कि कई ग्राम सभाओं के प्रधानों के चहेते बने हुए हैं। आखिर क्या वजह है कि नियम-कानूनों को ताक पर रखकर एक ही व्यक्ति को कई पंचायतों की जिम्मेदारी सौंप दी गई? क्या यह उच्चाधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव है।जब मस्टर रोल में ऐसे लोग शामिल हैं जो फावड़ा उठाने की शक्ति भी नहीं रखते, तो धरातल पर हुए कार्यों की गुणवत्ता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। यह स्पष्ट रूप से सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी का मामला है।क्या खंड विकास अधिकारी (BDO) और संबंधित तकनीकी सहायकों को इस फर्जीवाड़े की भनक नहीं है।दिव्यांग व्यक्ति के नाम पर निकाली जा रही मजदूरी किसके बैंक खातों में जा रही है।नियम विरुद्ध तरीके से कई ग्राम सभाओं का कार्यभार देखने वाले रोजगार सेवक पर कार्रवाई कब होगी।यह खबर केवल एक भ्रष्टाचार की कहानी नहीं, बल्कि उस अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के शोषण की दास्तां है जिसे मोहरा बनाकर सिस्टम के सफेदपोश अपनी जेबें भर रहे हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस ‘महारथी’ रोजगार सेवक और उसके संरक्षकों पर कब हंटर चलाता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

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