बस्ती जनपद के गौर विकास खंड के कई गांवों में मनरेगा कार्यों में बड़े घोटाले का आरोप सामने आया है। सिटकोहर सरनागी, मदनपुरा और विशुनपुर सरनागी जैसे गांवों में सैकड़ों मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टर रोल भरकर भुगतान किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जिन कार्यों के लिए भुगतान दर्शाया गया है, वे मौके पर हुए ही नहीं हैं। उनका कहना है कि कई स्थानों पर न तो मिट्टी खुदाई हुई, न तालाब बने और न ही सड़कें बनीं, फिर भी ऑनलाइन पोर्टल पर मजदूरों की उपस्थिति और भुगतान दर्ज है।
इस मामले पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने कहा है कि तथ्य उपलब्ध कराने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि संदिग्ध मस्टर रोल को जल्द ही निरस्त कर दिया जाएगा।
गौर के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने भी मस्टर रोल निरस्त करने की बात कही है। हालांकि, यह सवाल उठ रहा है कि क्या केवल मस्टर रोल निरस्त करना ही पर्याप्त होगा। यदि फर्जी भुगतान हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी या नहीं, और संबंधित पंचायत सचिव, रोजगार सेवक तथा तकनीकी सहायक से जवाब मांगा जाएगा या नहीं।
सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बावजूद, यह मामला जमीनी हकीकत पर सवाल उठाता है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह शासन की पारदर्शिता और साख के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और सार्वजनिक जांच की मांग की है। उनकी मांग है कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहकर मौके पर भी की जाए, जिसमें भुगतान और मजदूरों का भौतिक सत्यापन शामिल हो। ग्रामीणों का मानना है कि जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई से ही इस अविश्वास को दूर किया जा सकता है।






























