बिना महिला स्टाफ के महिलाओं की अंदरूनी जांच और ऑपरेशन करने का सनसनीखेज दावा।
सीएमओ ने दिए जांच के आदेश, कहा- दोषी पाए जाने पर होगी सख्त विधिक कार्रवाई।
बस्ती (उत्तर प्रदेश):
जनपद के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत बांसी रोड, बड़ेवन इलाके में संचालित ‘नवजीवन क्लिनिक’ एक बार फिर विवादों में घिर गया है। क्लिनिक के संचालक, कथित डॉ. पी. कुमार पर बिना वैद्य पंजीकरण के क्लिनिक चलाने, मरीजों से इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूलने और चिकित्सकीय नैतिकता को ताक पर रखने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
नगर पंचायत रुधौली निवासी राकेश कुमार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) बस्ती को एक लिखित शिकायती पत्र सौंपा है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि ‘नवजीवन क्लिनिक’ का संचालक, जिसे क्षेत्र में ‘बंगाली डॉक्टर’ के नाम से भी जाना जाता है, बिना किसी डिग्री और रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से क्लिनिक चला रहा है।
शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए प्रमुख आरोप:
गुप्त रोग के नाम पर वसूली: शिकायत के अनुसार, यह क्लिनिक ‘गुप्त रोग विशेषज्ञ’ होने का दावा करता है और मरीजों को 100% आयुर्वेदिक इलाज की गारंटी देने वाले पोस्टर पूरे शहर में चिपका रखे हैं। आरोप है कि इलाज के नाम पर भोले-भाले मरीजों से 10 से 20 हजार रुपये तक वसूले जाते हैं और कोई पक्का बिल या पर्चा भी नहीं दिया जाता।
महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़: सबसे गंभीर आरोप यह है कि क्लिनिक में कोई महिला स्टाफ नहीं है। इसके बावजूद, पुरुष डॉक्टर द्वारा महिला मरीजों की अंदरूनी (गुप्तांग) जांच की जाती है, जो कि मेडिकल नियमों और सामाजिक मर्यादा के पूरी तरह खिलाफ है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि गलत तरीके से जांच करने के कारण एक महिला मरीज को गंभीर इन्फेक्शन हो गया।
अनजान हाथों से ऑपरेशन: यह भी आरोप है कि क्लिनिक में बिना किसी प्रशिक्षित सर्जन के ऑपरेशन और चीर-फाड़ की जाती है, जिससे कई मरीजों की हालत नाजुक हो चुकी है।
पोस्टर से खुला प्रचार, हकीकत कुछ और:
क्लिनिक के बाहर और शहर भर में लगे पोस्टरों (जैसा कि तस्वीरों में दिख रहा है) में डॉ. पी. कुमार 10 साल के अनुभव का दावा करते हैं। लेकिन बंद शटर पर चिपके ये पोस्टर और क्लिनिक की हालत एक झोलाछाप व्यवस्था की ओर इशारा करती है।
सीएमओ का बयान:
इस पूरे मामले पर बस्ती के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. राजीव निगम ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा, “मामला बेहद गंभीर है। शिकायत प्राप्त हुई है और इसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग की एक टीम गठित कर जल्द ही क्लिनिक पर छापेमारी और जांच की जाएगी। यदि क्लिनिक बिना रजिस्ट्रेशन संचालित पाया गया या महिलाओं के साथ अभद्रता और गलत इलाज के आरोप सही साबित हुए, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।”
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्या सच सामने आता है और मरीजों की जान और इज्जत से खेलने वाले ऐसे कथित डॉक्टरों पर प्रशासन कब तक लगाम लगा पाता है।
रिपोर्ट: सुशील शर्मा (जिला ब्यूरो चीफ़, बस्ती)
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