स्थान: पुलिस लाइन्स, सुलतानपुर* *पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर श्रीमती चारू निगम की अध्यक्षता में प्रताड़ित महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और मुख्य धारा से जोड़ने हेतु की गयी विशेष गोष्ठी*

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*पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर के कुशल निर्देशन में आज दिनांक 24.02.2026 को पुलिस लाइन्स स्थित सभागार में एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न कारणों से आर्थिक कमजोरी एवं सामाजिक प्रताड़ना का शिकार महिलाओं को केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।*

 

गोष्ठी के दौरान पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस का कार्य केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के पीड़ित और वंचित वर्गों को सुरक्षा के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान करना भी हमारी प्राथमिकता है। अक्सर देखा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर या सामाजिक रूप से प्रताड़ित महिलाएं उचित मार्गदर्शन के अभाव में और अधिक शोषण का शिकार होती हैं।

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पीड़ित महिलाओं को केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित रोजगारपरक योजनाओं (जैसे- मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, मुद्रा योजना आदि) की विस्तृत जानकारी प्रदान करना।

 

बैठक में उपस्थित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने थाना क्षेत्रों में ऐसी महिलाओं की पहचान करें जिन्हें मदद की आवश्यकता है। पुलिस विभाग अन्य संबंधित विभागों (जैसे समाज कल्याण विभाग, उद्योग केंद्र आदि) के साथ समन्वय स्थापित कर इन महिलाओं को सरकारी लाभ दिलाना सुनिश्चित करेगा।

 

बैठक में बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन और थानों पर नियुक्त बाल कल्याण अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के निर्देश दिए गये। गुमशुदा बच्चों की बरामदगी, बाल श्रम और बाल भिक्षावृत्ति के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने तथा पीड़ित बच्चों को तत्काल विधिक व मानसिक सहायता पहुँचाने पर चर्चा की गई। थानों पर आने वाले बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार (Child-Friendly Policing) सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया। बैठक में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्यगण, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, चाइल्ड हेल्पलाइन (1098), थाना प्रभारी AHTU/SJPU, वन स्टॉप सेंटर मैनेजर तथा जनपद के सभी थानों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

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गोष्ठी के अंत में पुलिस अधीक्षक महोदया द्वारा उपस्थित सभी को ‘बाल विवाह’ जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से मिटाने की शपथ दिलाई गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेटियों का भविष्य चूल्हे-चौके में नहीं, बल्कि शिक्षा और स्वावलंबन में है; इसलिए बाल विवाह को पूरी तरह प्रतिबंधित करने हेतु जन-जागरूकता अनिवार्य है।

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*”हमारा लक्ष्य है कि कोई भी महिला केवल मजबूरी के कारण अन्याय न सहे। जब महिला आर्थिक रूप से मजबूत होगी, तो वह अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग होगी।”*

 

 

 

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