भारतीय नेवी को मिला ‘डॉल्फिन हंटर’, समुद्र में दुश्मन की पनडुब्बियों का काल बनेगा INS अंजदीप

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INS Anjadip: एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट प्रोजेक्ट का चौथा जहाज INS अंजदीप चेन्नै में कमीशन हुआ। 77 मीटर लंबा और 1400 टन वजनी यह स्वदेशी वॉरशिप तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियान के लिए तैयार है तथा आधुनिक एएसडब्ल्यू सिस्टम से लैस है।

नई दिल्ली: एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) प्रोजेक्ट का चौथा शिप आईएनएस अंजदीप नेवी में कमिशन हो गया। चेन्नै पोर्ट पर आयोजित एक आधिकारिक समारोह में इसे कमिशन किया गया। कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता नेवी चीफ एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने की।

आईएनएस अंजदीप का नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित ऐतिहासिक अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। ये उथले तटीय क्षेत्रों (लिटोरल ज़ोन) में पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए खास तौर से से तैयार किए गए वॉरशिप की श्रृंखला का नवीनतम जहाज है। इस शिप में 80 पर्सेंट से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।

1400 टन है डॉल्फिन हंटर का वजन
‘डॉल्फिन हंटर’ के रूप में पहचाना जाने वाला यह 77 मीटर लंबा और 1400 टन वजन का जहाज तटीय क्षेत्रों में तेज प्रतिक्रिया और लंबे समय तक संचालन के लिए तैयार किया गया है।

क्या काम करता है INS अंजदीप
यह जहाज आधुनिक पनडुब्बी रोधी (एएसडब्ल्यू) उपकरणों और एक उन्नत एकीकृत कॉम्बेट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। ये समुद्र के नीचे मौजूद खतरों का पता लगाने, उनकी निगरानी करने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। इसमें हल माउंटेड सोनार ‘अभय’ भी शामिल है।

यही नहीं, यह भारतीय युद्धपोत हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से भी लैस है। शुक्रवार को चेन्नई में इसे नौसेना में शामिल किया गया। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख ने बताया कि वर्ष 2026 में लगभग 15 और पोत शामिल करने की योजना है, जो हम अब तक की सर्वाधिक सम्मिलन दर होगी। वहीं वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना का लक्ष्य 200 से अधिक पोतों वाली नौसेना बनने का है। इसके लिए वर्तमान में 50 पोत भारतीय शिपयार्डों में निर्मित हो रहे हैं।

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