विषय : बदलाव समूह द्वारा 25 जनवरी से शुरू किया गया मतदाता जागरूकता अभियान विद्यालय से होकर मंदिर मदरसा होते हुए खेत खलियान तक पहुँचा

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25 जनवरी 2026 को विद्यालय परिसर से शुरू हुआ मतदाता जागरूकता अभियान सप्ताह 29 जनवरी को भयापुरवा के खेत-खलिहानों तक पहुँच गया। इस अभियान ने समाज के विभिन्न पड़ावों को जोड़ते हुए मंदिर, मदरसा और अब खेती-किसानी से जुड़े क्षेत्रों में लोकतंत्र का संदेश पहुँचाया।

अभियान के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने कार्यक्रम में मौजूद हर व्यक्ति को भीतर तक सोचने पर मजबूर कर दिया। मतदाता जागरूकता कार्यक्रम में शामिल एक बच्चे के हाथों में खुरपी दिखी, जिन नन्हे हाथों में किताब, कॉपी और कलम होना चाहिए था। उनमें खुरपी होना केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक तंत्र पर एक गहरा सवाल था।

इस दृश्य ने यह स्पष्ट कर दिया कि मतदाता जागरूकता केवल वोट डालने की प्रक्रिया समझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस भविष्य के चुनाव से जुड़ी है, जिसे हम अपने वोट के ज़रिये तय करते हैं। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जब तक हर बच्चे को शिक्षा, हर परिवार को इलाज और हर नागरिक को सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र अधूरा रहेगा। बदलाव समूह ने लोगों को जागरूक करते हुए एक सशक्त और विचारोत्तेजक नारा दिया “आपका वोट पढ़ाई, दवाई और भलाई के नाम पर होना चाहिए, न कि धन, मदिरा और लड़ाई के नाम पर।”

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ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं ने इस कार्यक्रम को न केवल सराहा, बल्कि इसे अपने जीवन से जोड़कर देखा। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा नुकसान तब होता है, जब वोट को लालच, डर और नफरत से खरीदा या मोड़ा जाता है। कार्यक्रम के दौरान लोगों से अपील की गई कि वे चुनाव के समय यह सोचें कि उनका एक वोट किसके हाथ में शिक्षा देगा, किसके हाथ में इलाज पहुँचाएगा और किस समाज की दिशा तय करेगा। खेत-खलिहान में खड़े होकर दिया गया यह संदेश और भी अधिक प्रभावशाली बन गया। इस दौरान रमेश, नरेश, रामपाल, सकीना, जानकी, पंडा यादव, ननके, राजू, अली अब्बास आदि ग्रामीण मौजूद रहे।

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बदलाव समूह ने कहा कि यह अभियान केवल एक सप्ताह की गतिविधि नहीं है, बल्कि समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करने का प्रयास है, ताकि हर नागरिक यह समझ सके कि उसका वोट केवल बटन दबाने की क्रिया नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करने का माध्यम है। कार्यक्रम का समापन इस भावपूर्ण संदेश के साथ हुआ “जिस दिन हर बच्चे के हाथ में खुरपी नहीं, कलम होगी, उसी दिन लोकतंत्र सच में मजबूत होगा।”

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जारीकर्ताः
बदलाव समूह
(राजनीतिक एवं सामाजिक परिवर्तन हेतु जनआंदोलन)

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