कामकाजी महिलाओं की मातृत्व अवकाश अवधि एक वर्ष तक बढ़ाई जाए

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महिलाओं का जीवन आज बहुत भागदौड़ भरा हो गया है। कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने वाली कई महिलाएं लैपटॉप पर लगातार १२ घंटे तक काम करती हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

शिवसेना की विधायक डॉ. मनीषा कायंदे ने आज महाराष्ट्र विधान परिषद में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रसूति के बाद महिलाओं को फिलहाल छह महीने की मातृत्व अवकाश (मेटरनिटी लीव) मिलती है। लेकिन कई माताओं को छह महीने के छोटे बच्चे को पाळनाघर (डे-केयर) में छोड़कर फिर से काम पर लौटना पड़ता है, जो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सरकार से मांग की कि मातृत्व अवकाश की अवधि बढ़ाकर एक वर्ष की जाए, ताकि मां अपने बच्चे की सही देखभाल कर सके और बच्चे का स्वास्थ्य भी बेहतर रहे। डॉ. मनीषा कायंदे यह बात अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रखे गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में कह रही थीं।(Maternity leave period for working women should be increased to one year.)

सरकार और महिला आर्थिक विकास महामंडल के माध्यम से कई योजनाएं 

शिवसेना की विधायक डॉ. मनीषा कायंदे ने कहा कि महिलाओं के लिए सरकार और महिला आर्थिक विकास महामंडल के माध्यम से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि उस समय के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लाड़ली बहन जैसी महत्वपूर्ण योजना शुरू की थी।

उन्होंने कहा कि इस योजना का विपक्ष ने विरोध किया और मामला अदालत तक भी ले जाया गया। लेकिन उस समय मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने मजबूती से इस योजना का समर्थन किया और इसे जारी रखा। इसके लिए डॉ. मनीषा कायंदे ने सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि १५०० रुपये से क्या होगा। लेकिन लाड़ली बहनों ने इन पैसों का सही उपयोग किया। कई महिलाओं ने इन पैसों से अपने बच्चों की स्कूल फीस भरी, कुछ ने छोटा व्यवसाय शुरू किया, तो कुछ ने इलाज करवाया और घर की जरूरी चीजें खरीदीं। यानी यह राशि महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित हुई।

13 जिलों में “उमेद मॉल” शुरू करने की योजना

डॉ. कायंदे ने कहा कि राजमाता जिजाऊ, अहिल्याबाई होल्कर, सावित्रीबाई फुले और माता रामाबाई जैसी महान महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण और समाज को दिशा देने का महान कार्य किया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के बजट में १३ जिलों में “उमेद मॉल” शुरू करने की योजना बनाई गई है, जिससे महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध होगा और उन्हें आर्थिक रूप से और मजबूत बनने में मदद मिलेगी।

 बदलती जीवनशैली और बढ़ते काम के दबाव के कारण नौकरी करने वाली महिलाओं को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिवसेना की विधायक डॉ. मनीषा कायंदे ने मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को होने वाली शारीरिक परेशानियों का मुद्दा भी सदन में उठाया।

उन्होंने कहा कि अभी नौकरी करने वाली महिलाओं को छह महीने की मातृत्व अवकाश (मेटरनिटी लीव) दी जाती है। लेकिन छह महीने के बाद महिलाओं को अपने छोटे बच्चे को डे-केयर या पाळनाघर में छोड़कर फिर से काम पर जाना पड़ता है। इससे बच्चे को मां का स्तनपान और सही पोषण नहीं मिल पाता, जिसका उसके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। इसलिए कामकाजी महिलाओं को एक साल की मातृत्व अवकाश दी जानी चाहिए।

डॉ. कायंदे ने यह भी बताया कि जर्मनी में नौकरी करने वाली महिलाओं को एक साल की मातृत्व अवकाश दी जाती है। उन्होंने आगे कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने भी महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। वहां गर्भाशय की सर्जरी (हिस्टेरेक्टॉमी) कराने वाली महिलाओं को कुछ हफ्तों की सवेतन छुट्टी (पेड लीव) देने का निर्णय लिया गया है। डॉ. मनीषा कायंदे ने मांग की कि महाराष्ट्र सरकार को भी इसी तरह का फैसला लेना चाहिए, ताकि महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समय पर्याप्त आराम और सुविधा मिल 

शिवसेना की विधायक डॉ. मनीषा कायंदे ने आगे कहा कि घरेलू हिंसा रोकथाम कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रोटेक्शन ऑफिसरों की संख्या बढ़ाना बहुत जरूरी है। उन्होंने यह भी मांग की कि महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग में खाली पड़े सदस्य पदों को तुरंत भरा जाए। इसके साथ ही महिलाओं की मदद के लिए काउंसलर और वकीलों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में अध्यक्ष और अन्य पद लंबे समय से खाली हैं, उन्हें भी जल्द भरा जाना चाहिए। इसी तरह महिला आर्थिक विकास महामंडल में खाली पदों को भी तुरंत भरने की जरूरत है।

डॉ. कायंदे ने पिछले कुछ वर्षों में लड़कियों और महिलाओं के लापता होने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि रेलवे स्टेशन, एसटी डिपो और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाया जाए, जिससे सुरक्षा बढ़ सके। इस संदर्भ में उन्होंने पंढरपुर की वारी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि वहां पुलिस अधिकारी अतुल कुलकर्णी के नेतृत्व में करीब २० लाख वारकरियों का फेस रिकग्निशन किया गया था। इस तकनीक के जरिए व्यक्ति के अन्य बायोमेट्रिक डेटा, जैसे रेटिना स्कैन भी किया जा सकता है। डॉ. मनीषा कायंदे ने कहा कि ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करने से लड़कियों और महिलाओं के अपहरण जैसे अपराधों को रोकने में काफी मदद मिल सकती है।

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