मुझे फंसाने की थी साजिश… CM फडणवीस का उद्धव सरकार पर बड़ा दावा

5
News Desk
Advertisement

मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (CM Devendra Fadnavis) ने कहा है कि पूर्व DGP रश्मि शुक्ला (Rashmi Shukla) की ओर से सौंपी गई SIT रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछली उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के नेतृत्व वाली MVA सरकार के दौरान उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की गई थी. सूत्रों की तरफ से ऐसा दावा किया गया कि डीजीपी रश्मि शुक्ला ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा की गई जांच के आधार पर गृह विभाग को एक रिपोर्ट सौंपी थी.

ये रिपोर्ट उन्होंने 3 जनवरी को रिटायर होने से पहले दिया था. उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि तत्कालीन DGP संजय पांडे, पुलिस उपायुक्त लक्ष्मीकांत पाटिल और सहायक पुलिस आयुक्त सरदार पाटिल, ठाणे नगर पुलिस स्टेशन में 2016 में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले की फिर से जांच करके सीएम फडणवीस और मौजूदा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को फंसाने की साजिश में शामिल थे.

यहां भी पढ़े:  सोना खरीदने वालों की चांदी…आज अचानक बदल गए गहनों के दाम; जानें आपके शहर में कितना सस्ता हुआ सोना

ये उस समय की बात है जब सीएम देवेंत्र फडणवीस विधानसभा में विपक्ष के नेता थे और उपमुख्यमंत्री शिंदे उस समय मंत्री थे. सूत्रों ने बताया कि रश्मि शुक्ला ने इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट दर्ज करने की सिफारिश की थी. SIT रिपोर्ट पर एक सवाल के जवाब में सीएम फडणवीस ने शनिवार शाम को पत्रकारों से कहा कि MVA शासन के दौरान बदले की राजनीति स्थापित हो गई है कि कैसे मुझे झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की गई. 2016 में श्यामसुंदर अग्रवाल और उनके पूर्व बिजनेस पार्टनर, रियल एस्टेट डेवलपर संजय पुनामिया के बीच विवाद के बाद ठाणे नगर पुलिस स्टेशन में अग्रवाल के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया था. 2017 में चार्जशीट दायर की गई थी.

यहां भी पढ़े:  भगवान विष्णु का एक ऐसा मंदिर जो शादीशुदा लोगों के लिए खोल देता है सौभाग्य के द्वार, जानें त्रियुगीनारायण धाम की चमत्कारी मान्यता

आरोप है कि ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार के सत्ता में रहने के दौरान राज्य पुलिस बल का नेतृत्व करने वाले पांडे ने मामले की फिर से जांच का आदेश दिया था. पुनामिया ने बाद में उसी पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि 2016 के मामले का इस्तेमाल 2021 और जून 2024 के बीच उन्हें परेशान करने और उनसे पैसे वसूलने के बहाने के रूप में किया गया था. उनकी शिकायत के आधार पर, 2024 में पांडे और सात अन्य के खिलाफ जबरन वसूली का मामला दर्ज किया गया था. BJP नेता और विधान परिषद सदस्य प्रवीण दारेकर ने महाराष्ट्र विधानमंडल में यह मुद्दा उठाया था, जिसमें दावा किया गया था कि यह फडणवीस और शिंदे को फंसाने की साजिश थी.

यहां भी पढ़े:  बंगाल में बाबरी मस्जिद विवाद पर बोले शत्रुघ्न सिन्हा, ‘भाजपा के पास अच्छा मुद्दा है जिसे…’

 

Advertisement