नई दिल्ली। भारत में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल, काम के समान अवसर और सामाजिक स्वतंत्रता के आधार पर की गई एक विस्तृत स्टडी के बाद वूमेन-फ्रेंडली शहरों की नई सूची जारी कर दी गई है। देश के 125 शहरों के गहन आकलन के बाद तैयार की गई इस रिपोर्ट में कर्नाटक की राजधानी बंगलुरू ने एक बार फिर बाजी मारी है। रिपोर्ट के अनुसार, बंगलुरू महिलाओं के रहने, काम करने और करियर में आगे बढ़ने के लिहाज से देश का सबसे अनुकूल शहर बनकर उभरा है।
इस रैंकिंग को तैयार करने के लिए सिटी इन्क्लूजन स्कोर (सीआईएस) को आधार बनाया गया है, जिसमें सामाजिक समावेश (सोशल इन्क्लूजन) और औद्योगिक समावेश (इंडस्ट्रियल इन्क्लूजन) दोनों को मापा गया। बंगलुरू ने 53.2 के स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया। आईटी और स्टार्टअप हब होने के नाते यहाँ बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस, रोजगार के प्रचुर अवसर और डिजिटल सशक्तीकरण जैसी खूबियां महिलाओं के पक्ष में रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ महिलाएं सुरक्षा के साथ-साथ व्यक्तिगत स्वतंत्रता का भी अनुभव करती हैं। सूची में दूसरा स्थान तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई को मिला है, जिसने 49.8 का स्कोर हासिल किया। चेन्नई ने विशेष रूप से सार्वजनिक सेवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन सुरक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय प्रदर्शन किया है। महाराष्ट्र का पुणे शहर तीसरे स्थान पर रहा, जहाँ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और जीवन स्तर में सुधार देखा गया। इसके बाद चौथे स्थान पर हैदराबाद और पांचवें स्थान पर सपनों की नगरी मुंबई रही। मुंबई को 44.4 की रेटिंग मिली है, हालांकि यह स्कोर के मामले में बंगलुरू से काफी पीछे रह गई है।
इस बार की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला सुधार हरियाणा के गुरुग्राम में देखा गया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से टॉप-10 में जगह बनाने वाला गुरुग्राम इकलौता शहर रहा। पिछली रैंकिंग में नौवें स्थान पर रहने वाला यह शहर तीन पायदान की छलांग लगाकर छठे स्थान पर पहुंच गया है। दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली और नोएडा जैसे प्रमुख शहर इस बार शीर्ष 10 की सूची में अपनी जगह बनाने में नाकाम रहे। रैंकिंग में सातवें स्थान पर कोलकाता रहा, जबकि गुजरात के अहमदाबाद को आठवां स्थान मिला। अहमदाबाद में महिलाओं के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) की सुविधाओं को सराहा गया। कोयंबटूर ने दसवें स्थान पर रहकर सबको प्रभावित किया, जहाँ स्ट्रीट लाइट ऑडिट और देर रात सफर करने वाली महिलाओं के लिए कम जोखिम भरे माहौल की प्रशंसा की गई। 2022 से अब तक के आंकड़ों पर आधारित यह 2025 की रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत के शहरी ढांचे में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और समावेशिता धीरे-धीरे बढ़ रही है, जिससे महिलाएं अब सामाजिक और पेशेवर दोनों मोर्चों पर खुद को अधिक सशक्त महसूस कर रही हैं।

































