भारत-चीन युद्ध में 600 किलो सोना दान करने वाली महारानी का निधन

49
Advertisement

दरभंगा। भारत-चीन (Indo-China) जंग (war) के दौरान भारत सरकार (Government of India) की अपील पर अपने खजाने के द्वार खोलकर करीब 600 किलो सोना (600 kg of gold) सरकार को दान देने वाली दरभंगा राजवंश की विरासत की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी पंचतत्व में विलीन हो गईं। हालांकि पारिवारिक विवाद के चलते अंतिम यात्रा से पहले उनके महल में परिजनों के बीच मारपीट तक हो गई।

यहां भी पढ़े:  कोलकाता का प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर, जहां के रक्षक हैं नकुलेश्वर भैरव, मां दुर्गा के उग्र स्वरूप की होती है पूजा, जानें शिव-सती से जुड़ा रहस्य

 

दरभंगा महाराज कामेश्वरसिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी महारानी कामसुंदरी देवी का अंतिम संस्कार आज दरभंगा राज परिसर स्थित माधेश्वर प्रांगण में पूरे हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ। बिहार सरकार की तरफ से उन्हें राजकीय सम्मान दिया गया और पोते रत्नेश्वरसिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी। बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल भी माधेश्वर प्रांगण पहुंचे और उन्होंने भी महारानी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। दरभंगा राजपरिवार ने अपनी निजी संपत्ति से कई सडक़ें, शिक्षा संस्थान और विश्वविद्यालय भी बनवाए थे।

यहां भी पढ़े:  भारत की पहली बुलेट ट्रेन 2027 तक पटरी पर दौड़ेगी, जान लीजिए पूरी डिटेल

 

परिजनों की मारपीट के बीच अंतिम संस्कार
हालांकि अंतिम यात्रा से पहले महारानी के आवास पर माहौल तनावपूर्ण हो गया। पारिवारिक विवाद के चलते बहस इतनी बढ़ गई कि मामला मारपीट तक पहुंच गया था। पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और झड़प देखी गई। झगड़े का कारण संपत्ति और उत्तराधिकार को लेकर विवाद बताया जा रहा है। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और दोनों पक्षों को अलग किया। इस मारपीट को लेकर पूरे शहर में जहां चर्चा है, वहीं राजघराने द्वारा किए गए अच्छे काम भी विवादों में आ गए।

यहां भी पढ़े:  भूलकर भी इस दिन ना खरीदें झाड़ू, घर से चली जाएगी बरत, जानें झाड़ू से जुड़े वास्तु नियम

 

Advertisement