जांच में खुलासा, दिल्ली में धमाके के लिए यासिर ने इस कारण फिदायीन बनने से किया था इनकार

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News Desk
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नई दिल्‍ली। दिल्ली में लाल किले (Red Fort in Delhi) के पास हुए कार बम धमाके (Car bomb attacks) की जांच में सामने आया है कि साजिश का मास्टरमाइंड डॉ. उमर उन नबी (Dr. Omar Un Nabi) दूसरे आत्मघाती हमलावर की भर्ती करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो सका क्योंकि उसके टार्गेट शोपियां के यासिर अहमद डार ने सेब की पैदावार के मौसम में अपने परिवार की मदद करने की जरूरत का हवाला देते हुए फिदायीन बनने से पीछे हट गया था। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि डार संभावित दूसरा फिदायीन हमलावर था लेकिन उसके पीछे हटने से डॉ. उमर के मंसूबे पर पानी फिर गया।

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यासिर अहमद डार किया गया था अरेस्ट

श्रीनगर पुलिस और एनआईए ने नबी की ओर से चलाए जा रहे एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि डॉ. नबी ही 10 नवंबर को लाल किले के पास विस्फोटकों से भरी कार ले गया था जिसके धमाके में 12 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ में डॉ. नबी की रणनीतियों का खुलासा हुआ है। इन्हीं जानकारी के आधार पर एनआईए ने शोपियां के रहने वाले यासिर अहमद डार को गिरफ्तार किया था।
यासिर को फिदायीन बनने के लिए कर लिया था तैयार

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जांच अधिकारियों के अनुसार, डॉ. उमर उन नबी ने यासिर अहमद डार को फिदायीन यानी आत्मघाती हमलावर बनने के लिए तैयार कर लिया था लेकिन पिछले साल अगस्त में वह पीछे हट गया था। उसने अंतिम समय में अपना इरादा बदलने के लिए घर की मरम्मत और सेब के सीजन का बहाना बनाया। जांच में सामने आया है कि डार साल 2023 से ही नबी के संपर्क में था। डॉ. उमर के जरिए उसको पूरी तरह कट्टरपंथी बनाया जा चुका था।

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