खरमास 14 जनवरी को खत्म होगा फिर भी जनवरी में विवाह और मांगलिक कार्य नहीं होंगे

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हिंदू धर्म में खगोलशास्त्र और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर तय होने वाले मांगलिक कार्यों के लिए इस साल का जनवरी माह लोगों के लिए कुछ सीमित शुभ अवसर लेकर आया है। दरअसल, 2026 में खरमास की अवधि 14 जनवरी को समाप्त हो जाएगी, लेकिन इसके बावजूद विवाह और अन्य मांगलिक कार्य शुरू नहीं होंगे। यह स्थिति ज्योतिषीय कारणों से उत्पन्न हो रही है, जिसके पीछे मुख्य भूमिका शुक्र ग्रह की है।

खरमास हिंदू पंचांग में विशेष महत्व रखता है। यह अवधि सूर्य भगवान के देवगुरु बृहस्पति की राशि में प्रवेश करने के समय शुरू होती है और लगभग एक माह तक चलती है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञ और अन्य मांगलिक कार्यों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहता है। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में सूर्य और बृहस्पति दोनों ग्रहों की ऊर्जा कमजोर रहती है। हिंदू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार विवाह और मांगलिक कार्य तभी शुभ माने जाते हैं जब ये ग्रह पूरी ऊर्जा के साथ उपस्थित हों।

सामान्य परिस्थितियों में, सूर्य देव जब धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास का समापन हो जाता है। इसके साथ ही मकर संक्रांति का पावन पर्व भी मनाया जाता है। इस दिन से साधारणत: मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं और शादी-ब्याह के मुहूर्त उपलब्ध होते हैं। लेकिन 2026 में यह प्रक्रिया थोड़ा विलंबित होगी।

खरमास इस बार 14 जनवरी को समाप्त होगा, जब सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही मकर संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक रूप से यह दिन शुभ अवसरों और नए कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

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हालांकि, इस साल मकर संक्रांति के बाद भी विवाह की शहनाइयां नहीं बजेंगी। इसका मुख्य कारण है शुक्र ग्रह का अस्त होना। हिंदू ज्योतिष में शुक्र ग्रह को प्रेम, दांपत्य सुख, वैवाहिक जीवन और विवाह का कारक माना जाता है। जब शुक्र ग्रह अस्त रहता है, तब विवाह और अन्य प्रेम-संबंधी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं बनते।

शुक्र ग्रह 11 दिसंबर 2025 से अस्त हैं और जनवरी माह के अधिकांश दिनों तक यह स्थिति बनी रहेगी। इस वजह से दिसंबर 2025 से ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्य स्थगित हैं। इस बार भी स्थिति वही बनी रहेगी और जनवरी में विवाह समारोह आयोजित नहीं किए जा सकेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, शुक्र ग्रह का उदय ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत का संकेत देता है। इस साल 2026 में शुक्र ग्रह का उदय 1 फरवरी को होगा। इसके बाद ही वैवाहिक समारोहों और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभ मुहूर्त शुरू होंगे। इस तरह, शादी-ब्याह का सीजन फरवरी 2026 से ही सक्रिय होगा।

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह अवधि शांति और संयम की सीख देती है। खरमास के समय धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य और आध्यात्मिक कार्यों में सक्रियता बढ़ती है। लोग इस समय मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और गरीबों तथा जरूरतमंदों की सहायता करते हैं। इस अवधि में मांगलिक कार्यों से परहेज करने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि यह समय ग्रहों की ऊर्जा कमजोर रहने का माना गया है।

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मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश होना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संकेत है। इस दिन को लेकर मान्यता है कि व्यक्ति नए कार्यों की शुरुआत कर सकता है, व्यवसाय में वृद्धि के प्रयास कर सकता है और व्यक्तिगत जीवन में सुख-शांति स्थापित कर सकता है। इसी दिन से धीरे-धीरे मांगलिक कार्य भी शुरू होने लगेंगे, क्योंकि सूर्य और बृहस्पति दोनों ग्रहों की ऊर्जा पुनः सक्रिय हो जाएगी।

ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि इस बार जनवरी में शादी या गृह प्रवेश जैसे काम की योजना बनाने वाले परिवार फरवरी के पहले सप्ताह तक प्रतीक्षा करें। शुक्र ग्रह के उदय के बाद ही विवाह और मांगलिक कार्यों का शुभ मुहूर्त निश्चित होता है। इसके अलावा, विवाह समारोह के लिए स्थान, मेहमान सूची और अन्य तैयारियों की योजना पहले ही बना लेना अच्छा रहेगा ताकि फरवरी में जैसे ही शुभ मुहूर्त आए, कार्य आसानी से संपन्न हो सके।

खरमास का समय हिंदू धर्म में आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। इस दौरान लोग अपनी आध्यात्मिक उन्नति और धार्मिक कृत्यों पर ध्यान देते हैं। विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के न होने का यह समय परिवारों को संयम और धैर्य की सीख देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब ग्रहों की स्थिति शुभ हो और ऊर्जा पूरी तरह सक्रिय हो, तब ही बड़े कार्य संपन्न करने चाहिए।

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इस बार 2026 में यह स्थिति इसलिए विशेष है क्योंकि खरमास का समापन और शुक्र ग्रह का अस्त समय के कारण विवाह और मांगलिक कार्यों में विलंब होगा। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे शुभ कार्यों की तैयारी के रूप में देखा जा सकता है।

अंततः, 14 जनवरी 2026 के बाद खरमास समाप्त होगा और मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाएगा। हालांकि, विवाह समारोह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए परिवारों को फरवरी की प्रतीक्षा करनी होगी, जब शुक्र ग्रह उदय होंगे और शुभ मुहूर्त शुरू होंगे। यह समय नई शुरुआत और उत्साह का प्रतीक है, जो लोगों के जीवन में प्रेम, सुख और समृद्धि लाने का संकेत देता है।

इस प्रकार, धार्मिक विश्वास और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जनवरी 2026 में विवाह और मांगलिक कार्य नहीं होंगे, लेकिन फरवरी से नए साल में नए उत्साह और शुभ अवसरों के साथ ये कार्य फिर शुरू हो जाएंगे। यह समय धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का है, जो आने वाले मांगलिक कार्यों के लिए ऊर्जा और शुभता का संचार करेगा।

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