दक्षिण अमेरिका की राजनीति और वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव ने अब खुला टकराव का रूप ले लिया है। अमेरिकी सेना के एक साहसिक और गोपनीय अभियान में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल लैटिन अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को कहा कि यदि वेनेजुएला के मौजूदा नेता “सही निर्णय” लेते हैं तो अमेरिका उनके साथ काम करने के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मादुरो को अमेरिकी हिरासत में रखा गया है और उन्हें आपराधिक मामलों में मुकदमे का सामना करने के लिए न्यूयॉर्क ले जाया जा रहा है। रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली ने दावा किया कि मार्को रुबियो ने उन्हें बताया है कि मादुरो को अमेरिकी बलों ने गिरफ्तार किया है और उन पर अमेरिका में आपराधिक आरोप लगाए जाएंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद वेनेजुएला की सुप्रीम कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को देश का अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त कर दिया है। टेलीविजन पर देश को संबोधित करते हुए रोड्रिगेज ने अमेरिका से मादुरो को तत्काल रिहा करने की मांग की और उन्हें वेनेजुएला का “एकमात्र वैध राष्ट्रपति” बताया। उन्होंने अमेरिका की इस कार्रवाई को संप्रभुता पर हमला करार देते हुए जनता से एकजुट होने का आह्वान किया।
अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई ने उसके कई सहयोगी देशों को असहज कर दिया है, जबकि कुछ देश और नेता पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस सख्त नीति से प्रभावित भी दिखे हैं। चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अमेरिका को मादुरो और उनकी पत्नी की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और उन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए। चीन का कहना है कि किसी संप्रभु देश के नेता को जबरन हिरासत में लेना अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक मानदंडों का उल्लंघन है। उत्तर कोरिया ने भी इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे वेनेजुएला की संप्रभुता में गंभीर हस्तक्षेप बताया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को मादुरो की गिरफ्तारी की घोषणा की थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को एक सैन्य अड्डे से हिरासत में लिया गया और फिर उन्हें एक अमेरिकी युद्धपोत के जरिए न्यूयॉर्क भेजा गया। अमेरिकी अभियोग में उन पर नार्को-आतंकवाद की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। अमेरिका का दावा है कि मादुरो शासन ड्रग तस्करी और संगठित अपराध से जुड़ा रहा है, हालांकि वेनेजुएला सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है।
मादुरो की गिरफ्तारी से पहले भी अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा था। बीते महीनों में कथित ड्रग-ले जाने वाली नौकाओं पर हमले, वेनेजुएला के तेल से भरे दो टैंकरों की जब्ती और देश के तट के पास अमेरिकी सैन्य जमावड़े ने हालात को और गंभीर बना दिया था। मादुरो की गिरफ्तारी को इन सभी घटनाओं की परिणति के रूप में देखा जा रहा है।
वेनेजुएला सरकार ने इस कार्रवाई को “साम्राज्यवादी हमला” करार दिया है और अपने नागरिकों से सड़कों पर उतरने की अपील की है। कराकास में मादुरो समर्थकों ने रैलियां कीं और उनके पोस्टर और तस्वीरें लेकर अमेरिका के खिलाफ नारे लगाए। राजधानी में कई स्थानों पर तनाव का माहौल देखा गया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 5 जनवरी को वेनेजुएला संकट पर आपात बैठक बुलाने की घोषणा की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात पर नजर बनाए हुए है कि यह संकट किस दिशा में जाएगा। कई देशों को आशंका है कि यदि स्थिति और बिगड़ी तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ सकता है।
मादुरो को न्यूयॉर्क के कुख्यात मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर, ब्रुकलिन में रखा गया है। यह वही जेल है जिसे लेकर पहले भी कई विवाद सामने आ चुके हैं और जहां कुछ न्यायाधीशों ने कैदियों को भेजने से इनकार किया है। इस जेल में करीब 1,300 कैदी हैं और यहां कई चर्चित हस्तियां भी रह चुकी हैं। मादुरो की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में वेनेजुएलाई प्रवासी जेल के बाहर जमा हो गए और इसे अपनी जीत बताते हुए जश्न मनाया।
विश्लेषकों का मानना है कि मादुरो की गिरफ्तारी से वेनेजुएला की राजनीति में बड़ा शून्य पैदा हो गया है। डेल्सी रोड्रिगेज की अंतरिम नियुक्ति के बावजूद सत्ता संतुलन अस्थिर बना हुआ है। अमेरिका जहां इसे लोकतंत्र और कानून के पक्ष में कदम बता रहा है, वहीं कई देश इसे खतरनाक मिसाल मान रहे हैं। यह मामला अब केवल दो देशों के बीच का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच यह टकराव किस दिशा में जाता है। क्या कोई कूटनीतिक समाधान निकलेगा या यह संकट और गहराएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। इतना तय है कि मादुरो की गिरफ्तारी ने वैश्विक राजनीति के समीकरणों को हिला दिया है और इसका असर लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।





























