Anthropic के एक कदम से सॉफ्टवेयर और लीगल मार्केट में मचा हड़कंप, स्वाहा हुए 26 हजार अरब रुपए

8
Advertisement

नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक नए धमाके ने शेयर बाजार की नींव हिला दी है. Claude चैटबॉट बनाने वाली कंपनी Anthropic ने हाल ही में कुछ ऐसे AI प्लगइन्स लॉन्च किए हैं, जिनकी वजह से ग्लोबल मार्केट से देखते ही देखते 285 अरब डॉलर (करीब 26,129 अरब रुपये) साफ हो गए. इस नए ‘एजेंटिक एआई’ का सबसे गहरा असर सॉफ्टवेयर, लीगल टेक और फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है, जहां भारी गिरावट दर्ज की गई है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने 30 जनवरी को 11 नए ओपन सोर्स प्लगइन्स पेश किए हैं, जो विशेष रूप से ‘Claude Cowork’ टूल्स के साथ काम करने के लिए डिजाइन किए गए हैं. इनमें से एक विशेष टूल लीगल वर्कफ्लो यानी कानूनी कामकाज को ऑटोमेट करने के लिए बनाया गया है और यही मार्केट में मचे हाहाकार की मुख्य वजह बना हुआ है. दरअसल, एंथ्रोपिक का क्लॉड कोवर्क (Claude Cowork) एक ‘एजेंटिक एआई असिस्टेंट’ है, जिसे जनवरी की शुरुआत में ही बाजार में उतारा गया था.

यहां भी पढ़े:  सिंगुर रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा हमला, ममता बनर्जी पर तेज हुई राजनीतिक टकराव

जहां अब तक एआई टूल्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से कोडिंग के लिए होता था, वहीं एंथ्रोपिक के ये नए टूल्स नॉन-कोडिंग कार्यों को भी बड़ी आसानी से निपटा सकते हैं. ये प्लगइन्स फाइलें पढ़ने, फोल्डर्स को व्यवस्थित करने, डॉक्यूमेंट्स ड्राफ्ट करने और मल्टी-स्टेप टास्क को पूरा करने में सक्षम हैं. इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि कंपनियां इन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज कर सकती हैं. यानी किसी काम को कैसे करना है और किन चीजों को ऑटोमेट करना है, यह सब अब बेहद आसान हो गया है. इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है, जो अब तक इन सेवाओं को बेचती थीं.

यहां भी पढ़े:  पेट्रोल की कीमतों में बड़ा फेरबदल…क्या आपके शहर में घट गए दाम? यात्रा पर निकलने से पहले चेक करें आज की रेट लिस्ट

बाजार में मची इस खलबली की असली वजह एंथ्रोपिक की बदलती रणनीति है. विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी ने केवल टूल्स का सेट लॉन्च नहीं किया है, बल्कि काम करने का एक नया तरीका ईजाद कर लिया है. एंथ्रोपिक अब सिर्फ एआई मॉडल्स या एपीआई (API) बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह सीधे वर्कफ्लो पर अधिकार जमा रही है. आसान भाषा में समझें तो अगर कंपनी सिर्फ एपीआई देती तो थॉमसन रॉयटर्स जैसी कंपनियां अपनी सर्विस उस पर बना लेतीं, लेकिन एंथ्रोपिक ने ‘रेडीमेड सॉल्यूशन’ बेचना शुरू कर दिया है. इसका मतलब है कि अब वह सर्विस प्रोवाइडर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर इन दिग्गज कंपनियों की प्रतियोगी (Competitor) बन गई है, जिससे निवेशकों में डर का माहौल है.

Advertisement