ईरान ने फारस की खाड़ी में गुरुवार को दो विदेशी तेल टैंकरों को जब्त कर लिया। ईरानी सरकारी मीडियाी मीडिया के मुताबिक इन टैंकरों पर ईंधन की तस्करी का आरोप लगाया गया है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में एक बार फिर समुद्री सुरक्षा और तनाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि ईरान ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि ये टैंकर किस देश के हैं या वे किस झंडे के तहत परिचालन कर रहे थे।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौसेना से जुड़े क्षेत्रीय कमांडर जनरल हैदर हुनारियन मोजर्रद ने बताया कि दोनों टैंकरों को फारसी द्वीप के पास पकड़ा गया और बाद में बुशहर बंदरगाह ले जाया गया। उनके अनुसार इन जहाजों में करीब 10 लाख लीटर ईंधन, जिसमें डीजल भी शामिल है, ले जाया जा रहा था। यह मात्रा लगभग 6,300 बैरल के बराबर बताई जा रही है।
ईरानी अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि दोनों टैंकरों पर सवार कुल 15 क्रू मेंबर्स को हिरासत में ले लिया गया है। इन सभी को न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में रखा गया है। हालांकि क्रू सदस्यों की राष्ट्रीयता को लेकर भी कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। ईरानी मीडिया का कहना है कि मामले की जांच जारी है और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने इस तरह की कार्रवाई की हो। इससे पहले भी ईरान कई बार फारस की खाड़ी और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल ले जा रहे विदेशी जहाजों को ईंधन तस्करी या अन्य आरोपों के तहत जब्त कर चुका है। बीते साल दिसंबर में भी ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक विदेशी टैंकर को जब्त किया था, जिसमें 16 क्रू मेंबर्स को हिरासत में लिया गया था। वहीं नवंबर में भी इसी क्षेत्र में एक अन्य जहाज को पकड़ा गया था।
फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य या सुरक्षा कार्रवाई का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है।
पश्चिमी देशों ने पहले भी ईरान पर क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाने के आरोप लगाए हैं। वर्ष 2019 में कई तेल टैंकरों पर लिम्पेट माइन हमलों के लिए भी ईरान को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसके अलावा 2021 में एक इजरायल से जुड़े तेल टैंकर पर ड्रोन हमले में दो यूरोपीय नागरिकों की मौत हो गई थी, जिसके पीछे भी ईरान का हाथ होने का आरोप लगाया गया था। हालांकि ईरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं उस तनाव की याद दिलाती हैं, जो अमेरिका द्वारा 2015 के परमाणु समझौते से अलग होने के बाद से लगातार बना हुआ है। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से एकतरफा तौर पर बाहर निकलने का फैसला किया था, जिसके बाद से पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव और गहरा गया।
फिलहाल ईरान द्वारा दो विदेशी तेल टैंकरों की जब्ती ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान फारस की खाड़ी की स्थिति पर केंद्रित कर दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि इन जहाजों और क्रू के साथ आगे क्या कार्रवाई की जाती है और क्या इस घटना पर संबंधित देशों या अंतरराष्ट्रीय संगठनों की कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।





























