जबलपुर. साहित्य मात्र शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह वह सुकोमल सेतु है जो संस्कृतियों को सरहदों के पार ले जाकर एक सूत्र में पिरोता है. इसी विचार को आत्मसात करते हुए अंतरराष्ट्रीय पटल पर हिंदी के गौरव को प्रतिष्ठित करने वाली प्रमुख संस्था ‘सृजनगाथा डॉट कॉम’ ने अपने गौरवशाली 23वें वार्षिक सम्मान के लिए देश-दुनिया के रचनाकारों से प्रविष्टियाँ आमंत्रित की हैं. यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं है, बल्कि उन कलमकारों की साधना का वंदन है जो अपनी रचनाधर्मिता से समाज को नई दिशा दे रहे हैं. इस वर्ष का यह आयोजन इसलिए भी विशेष होने जा रहा है क्योंकि इसका विस्तार किसी एक भूभाग तक सीमित न रहकर जॉर्जिया, आर्मेनिया और अजरबैजान की वादियों तक फैलने वाला है. आगामी 1 से 14 जून 2026 के मध्य आयोजित होने वाले 26 वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन के भव्य मंच पर चयनित कथाकार और कवि को इस गरिमामय सम्मान से अलंकृत किया जाएगा.
सृजनगाथा डॉट कॉम की यह यात्रा पिछले दो दशकों से अधिक समय से अविरल जारी है, जिसमें साहित्य की शुचिता और श्रेष्ठता को सदैव सर्वोपरि रखा गया है. संस्था ने घोषणा की है कि इस प्रतिष्ठित सम्मान के अंतर्गत चयनित रचनाकारों को 11000 रुपये की नकद राशि, शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा. प्रविष्टियाँ भेजने की जिम्मेदारी केवल स्वयं लेखकों तक सीमित नहीं है, बल्कि साहित्य प्रेमी पाठक, सजग आलोचक, प्रतिष्ठित प्रकाशक और विभिन्न साहित्यिक संस्थाएँ भी अपने पसंदीदा और योग्य कथाकारों व कवियों के नाम की अनुशंसा कर सकते हैं. यह समावेशी दृष्टिकोण इस सम्मान को और भी अधिक पारदर्शी और व्यापक बनाता है, जहाँ केवल नाम नहीं बल्कि काम की गूँज को प्राथमिकता दी जाती है. संस्था ने स्पष्ट किया है कि प्रविष्टियाँ प्राप्त करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है, जिससे पूर्व इच्छुक प्रतिभागी विस्तृत नियमावली के लिए संस्था के आधिकारिक ईमेल पर संपर्क कर सकते हैं.
यदि हम सृजनगाथा के अतीत के झरोखों में झांकें, तो इस सम्मान की सूची किसी साहित्यिक आकाशगंगा की तरह प्रतीत होती है. अब तक इस मंच ने डॉ. सुधीर सक्सेना, गीताश्री, एकांत श्रीवास्तव और संतोष श्रीवास्तव जैसे लब्धप्रतिष्ठ नामों को सम्मानित किया है. जबलपुर के ही प्रख्यात रचनाकार असंग घोष सहित देश के विभिन्न कोनों और विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के साहित्यकारों जैसे पूर्णिमा वर्मन और कृष्ण बिहारी ने भी इस सम्मान की गरिमा बढ़ाई है. शरद पगारे, निर्मला भुराड़िया और डॉ. बीना बुदकी जैसे नामों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि सृजनगाथा ने सदैव भाषाई सीमाओं और भौगोलिक दूरियों को मिटाकर हिंदी के वैश्विक परिवार को एक छत के नीचे लाने का प्रयास किया है. नेपाल के कुमुद अधिकारी और काठमांडू के डॉ. भीष्म उप्रेती की इस सूची में उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि हिंदी की खुशबू पड़ोसी देशों की सरहदों को पार कर वैश्विक मंच पर अपना स्थान बना चुकी है.
आगामी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में तीन देशों के साझा सहयोग से आयोजित होने वाला यह उत्सव भारतीय साहित्य के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा. जॉर्जिया की प्राचीन वास्तुकला, आर्मेनिया के पहाड़ों और अजरबैजान के आधुनिक परिदृश्य के बीच जब हिंदी की कविताएँ और कहानियाँ सुनाई जाएँगी, तो वह दृश्य निश्चित रूप से हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊँचा कर देगा. इस सम्मान का उद्देश्य केवल प्रतिभा को पुरस्कृत करना नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहाँ संवाद की भाषा केवल प्रेम और सृजन हो. जो साहित्यकार इस महायज्ञ में अपनी समिधा अर्पित करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है कि वे अपनी श्रेष्ठ कृतियों के माध्यम से वैश्विक हिंदी समुदाय का हिस्सा बनें. यह सम्मान उन सभी शुभचिंतकों और साहित्य साधकों के लिए एक पुकार है जो हिंदी को केवल एक भाषा नहीं, बल्कि एक संस्कृति के रूप में जीवित रखना चाहते हैं.
संस्था को प्रविष्टि प्राप्ति की अंतिम तिथि : 30 अप्रैल 2026 है .
प्रविष्टि नियमावली की विस्तृत जानकारी संस्था के ईमेल से संपर्क कर प्राप्त की जा सकती है : srijan2samman@gmail.com





























