अमेरिका की राजनीति और वैश्विक कूटनीति के केंद्र में रहने वाले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर ज्योतिषीय विश्लेषण एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु ने ट्रंप की जन्म कुंडली का विश्लेषण करते हुए दावा किया है कि वर्तमान समय में उनकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति विश्व राजनीति के लिए चुनौतीपूर्ण संकेत दे रही है। उनका कहना है कि ट्रंप की कुंडली में चंद्र-केतु और सूर्य-राहु का ग्रहण योग बनने से निर्णयों में अचानकता और अप्रत्याशितता बढ़ सकती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।
ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार ग्रहण योग व्यक्ति के स्वभाव और निर्णय क्षमता पर गहरा प्रभाव डालता है। पंडित नेमा के मुताबिक चंद्र-केतु का प्रभाव मानसिक स्तर पर अस्थिरता और अचानक फैसले लेने की प्रवृत्ति को बढ़ा सकता है, जबकि सूर्य-राहु का योग सत्ता और प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में विवाद और टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है। उनका कहना है कि यदि ऐसे योग किसी प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति की कुंडली में सक्रिय हो जाएं, तो उनके निर्णयों का प्रभाव केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता बल्कि व्यापक राजनीतिक और वैश्विक परिस्थितियों को भी प्रभावित कर सकता है।
पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु के अनुसार ट्रंप की राशि वृश्चिक मानी जाती है, जो स्वभाव से तीव्र, साहसी और कई बार आक्रामक मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र में वृश्चिक राशि के जातकों को दबंग और स्पष्टवादी माना जाता है, लेकिन यही गुण कई बार टकराव और विवाद का कारण भी बन सकते हैं। उनका कहना है कि इस राशि के प्रभाव के कारण ट्रंप का स्वभाव कई बार विरोधियों को सीधे चुनौती देने वाला हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस तरह की शैली कई बार संबंधों में तनाव बढ़ाने का कारण बनती है।
ज्योतिषीय गणना के आधार पर वर्तमान समय में शनि ग्रह का प्रभाव भी ट्रंप की कुंडली के महत्वपूर्ण स्थान पर माना जा रहा है। पंडित नेमा के अनुसार शनि का प्रभाव व्यक्ति को कठोर निर्णय लेने की ओर प्रेरित कर सकता है। इसका परिणाम यह हो सकता है कि राजनीतिक और कूटनीतिक फैसलों में सख्ती दिखाई दे। उनका कहना है कि जब शनि बुद्धि से जुड़े स्थान पर प्रभाव डालता है तो व्यक्ति अपने निर्णयों में दृढ़ रहता है, लेकिन कई बार यह स्थिति विवाद और विरोध को भी जन्म दे सकती है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार ट्रंप की कुंडली में बुद्धि के स्वामी गुरु की स्थिति भी इस समय महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गुरु का अष्टम स्थान में होना अचानक घटनाओं और अप्रत्याशित राजनीतिक परिस्थितियों का संकेत देता है। अष्टम भाव को ज्योतिष में परिवर्तन और रहस्यमयी घटनाओं का भाव माना जाता है। पंडित नेमा का कहना है कि इस स्थिति के कारण वैश्विक राजनीति में अचानक संकट, राजनीतिक तनाव या कूटनीतिक टकराव जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि आने वाले समय में ग्रहों की स्थिति में बदलाव के कारण परिस्थितियां धीरे-धीरे सामान्य हो सकती हैं। उनके अनुसार 11 मार्च के बाद गुरु ग्रह के मार्गी होने से निर्णयों में संतुलन आने की संभावना बनती दिखाई दे रही है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु को ज्ञान, विवेक और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में गुरु के सीधा होने से परिस्थितियों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल सकते हैं।
पंडित नेमा का कहना है कि जून 2026 के बाद ग्रहों की स्थिति ट्रंप के व्यवहार और नीतियों में कुछ नरमी ला सकती है। उनके अनुसार उस समय ग्रहों के प्रभाव में ऐसा परिवर्तन दिखाई देता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होने की संभावना बन सकती है। उनका मानना है कि इस अवधि के बाद लगभग एक वर्ष तक वैश्विक स्तर पर अपेक्षाकृत राहत, स्थिरता और सकारात्मक संकेत देखने को मिल सकते हैं।
ज्योतिषीय विश्लेषण को लेकर समाज में हमेशा अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं। कुछ लोग इसे पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानते हैं, जबकि कई विशेषज्ञ इसे केवल एक मान्यता के रूप में देखते हैं। इसके बावजूद राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों की कुंडली को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है, खासकर तब जब उनके फैसलों का असर बड़े स्तर पर पड़ता है।
पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु लंबे समय से ज्योतिष और वास्तु के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वह स्वयं को मां कामख्या का साधक बताते हैं और जन्म कुंडली विश्लेषण के आधार पर भविष्य की संभावनाओं पर अपनी राय देते हैं। उनके अनुसार ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के स्वभाव और निर्णयों को प्रभावित कर सकती है, हालांकि अंतिम परिणाम कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
वैश्विक राजनीति के संदर्भ में ट्रंप का नाम आज भी प्रभावशाली नेताओं में लिया जाता है। अमेरिका की राजनीति में उनकी भूमिका और उनके फैसलों का असर कई देशों की नीतियों पर पड़ा है। ऐसे में उनकी कुंडली को लेकर किए गए किसी भी प्रकार के ज्योतिषीय विश्लेषण को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
फिलहाल पंडित नेमा के इस विश्लेषण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ग्रहों की स्थिति वास्तव में वैश्विक घटनाओं को प्रभावित कर सकती है या यह केवल एक आस्था और परंपरा से जुड़ा दृष्टिकोण है। हालांकि आने वाले महीनों में विश्व राजनीति में होने वाली घटनाएं ही यह तय करेंगी कि इन ज्योतिषीय दावों को किस नजर से देखा जाएगा।
ज्योतिषाचार्य का मानना है कि ग्रहों के प्रभाव को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता, लेकिन इसे अंतिम सत्य मानना भी उचित नहीं है। उनके अनुसार ज्योतिष संभावनाओं का विज्ञान है, जो भविष्य की दिशा के संकेत देता है। आने वाले समय में यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और राजनीतिक परिस्थितियां स्थिर होती हैं, तो इसे ग्रहों की स्थिति में आए बदलाव से भी जोड़कर देखा जा सकता है।
*पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु*(9893280184)
मां कामाख्या साधक जन्म कुंडली विशेषज्ञ वास्तु शास्त्री




































