रांची. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में बुधवार को हुई झारखंड मंत्रिपरिषद की अहम बैठक में राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. इस बैठक में कुल 18 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें विधानसभा के शीतकालीन सत्र की तिथि निर्धारण से लेकर कांस्टेबल भर्ती नियमों में बदलाव, हर जिले में STEM लैब की स्थापना और देवघर में एक नए चार सितारा होटल के निर्माण जैसे निर्णय शामिल हैं. सरकार के अनुसार, ये फैसले राज्य में प्रशासनिक दक्षता, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेंगे.
बैठक के बाद कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने बताया कि झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 दिसंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर तक चलेगा. इस दौरान कुल पांच कार्यदिवस निर्धारित किए गए हैं. सत्र में सरकार वित्तीय, विधायी और प्रशासनिक मामलों पर चर्चा करेगी तथा आगामी वर्ष के विकास कार्यक्रमों की दिशा तय करने पर जोर देगी.
कैबिनेट ने बैठक में यह भी निर्णय लिया कि झारखंड राज्य में ‘क्लेरियस मांगुर’ नामक मछली को अब राजकीय मछली का दर्जा दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे इस प्रजाति के संरक्षण और संवर्धन को बल मिलेगा तथा मत्स्य पालन से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे. वन, मत्स्य और पर्यावरण विभाग को इसके संरक्षण हेतु ठोस योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.
शिक्षा के क्षेत्र में भी एक बड़ा फैसला लिया गया. सरकार ने हर जिले में एक ‘मुख्यमंत्री उत्कृष्टता विद्यालय’ में STEM (विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) लैब स्थापित करने की मंजूरी दी है. प्रत्येक लैब पर लगभग 20 लाख रुपये की लागत आएगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि “भविष्य विज्ञान और तकनीक का है, इसलिए झारखंड के बच्चों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है.” शिक्षा विशेषज्ञों ने इस कदम को राज्य में तकनीकी कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है.
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी बैठक में एक बड़ा निर्णय लिया गया. देवघर में ‘होटल बैद्यनाथ बिहार’ नामक एक चार सितारा होटल के निर्माण को मंजूरी दी गई है. यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित की जाएगी. होटल के निर्माण पर लगभग 113.97 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. सरकार का कहना है कि यह होटल धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगा और देवघर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराएगा.
बैठक में पुलिस विभाग से जुड़े अहम निर्णय भी लिए गए. ‘इंडिया रिजर्व बटालियन’ में उप-निरीक्षक (वायरलेस) और कांस्टेबल भर्ती के नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई. अब पुरुष उम्मीदवारों के लिए 1600 मीटर दौड़ का समय 6 मिनट और महिलाओं के लिए 10 मिनट निर्धारित किया गया है. इसके साथ ही तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन से जुड़े नियमों को भी हरी झंडी दी गई. गृह विभाग ने बताया कि इन संशोधनों से भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बनेगी तथा शारीरिक परीक्षा के मानदंड राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप होंगे.
बैठक में कई अन्य प्रशासनिक और वित्तीय प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई. इनमें राज्य में सड़क निर्माण परियोजनाओं की गति तेज करने, ग्रामीण विकास योजनाओं में तकनीकी संसाधनों के उपयोग को बढ़ाने और शहरी निकायों की वित्तीय क्षमता को सशक्त बनाने जैसे मुद्दे शामिल थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि “सरकार का उद्देश्य है कि झारखंड के हर नागरिक तक विकास की रोशनी पहुँचे और निर्णयों का लाभ सीधा जनता को मिले.”
बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि झारखंड सरकार जनता के भरोसे को सर्वोपरि मानती है. उन्होंने कहा, “यह कैबिनेट बैठक राज्य की प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई है. हमने ऐसे प्रस्तावों को मंजूरी दी है जो न केवल सरकारी कामकाज को मजबूत करेंगे, बल्कि युवाओं, छात्रों और किसानों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाएंगे.”
राजनीतिक हलकों में इस बैठक को आगामी विधानसभा सत्र से पहले सरकार की बड़ी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है. विपक्ष ने जहाँ कुछ प्रस्तावों को “राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित” बताया, वहीं सरकार के मंत्रियों का कहना है कि यह कदम राज्य के समग्र विकास की दिशा में व्यावहारिक और दूरगामी सोच को दर्शाते हैं.
झारखंड में STEM लैब की स्थापना को लेकर शिक्षा विभाग ने पहले ही ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है, जिसमें ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को भी डिजिटल उपकरणों और प्रयोगशालाओं की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है. इसके अलावा ‘राजकीय मछली’ की घोषणा से ग्रामीण मत्स्य पालन समुदाय में उत्साह देखा जा रहा है. देवघर होटल परियोजना को लेकर पर्यटन उद्योग ने भी स्वागत किया है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय रोजगार में बढ़ोतरी की उम्मीद है.
कुल मिलाकर, झारखंड कैबिनेट की इस बैठक में लिए गए 18 प्रस्तावों को राज्य की नीतिगत दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक ओर जहाँ यह बैठक आगामी विधानसभा सत्र का एजेंडा तय करती दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर यह स्पष्ट संकेत देती है कि हेमंत सोरेन सरकार अब प्रशासनिक सुधारों, तकनीकी उन्नति और रोजगार सृजन के नए अध्याय की ओर कदम बढ़ा चुकी है.
झारखंड का यह निर्णयमूलक सप्ताह न केवल राज्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया को नई ऊर्जा दे रहा है, बल्कि यह संदेश भी दे रहा है कि आने वाला शीतकालीन सत्र केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि विकास के नए अध्याय की शुरुआत भी हो सकता है.

































