ईरान में आज कयामत की रात! अमेरिका शुरू करेगा ग्राउंड वॉर…अब फाइनल तबाही?

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ईरान युद्ध का दूसरा हफ्ता शुरू हो चुका है. इसी के साथ आज रात अमेरिका जंग का दूसरा चरण शुरू कर सकता है. जिसमें अमेरिका ईरान पर इतनी मिसाइलें और बम बरसाने वाला है, जितने आज तक नहीं गिराए गए. इसका एलान किसी और ने नहीं बल्कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने किया है. सिर्फ इतना ही नहीं रिपोर्ट्स की मानें को ट्रंप ईरान में रिकॉर्ड तोड़ हमलों के साथ ही ग्राउंड ऑपरेशन की हरी झंडी भी दे सकते हैं. जिसका लक्ष्य ईरानी खतरे को हमेशा के लिए खत्म करना होगा. ईरान का संवर्धित यूरेनियम इस्फहान न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स, फोर्दो संवर्धन प्लांट, और नतांज परमाणु केंद्र में मौजूद था. लेकिन दावा किया जाता है जून में 12 दिन युद्ध के दौरान अमेरिका के हमले से पहले इस यूरेनियम को यहां से हटा दिया गया.

रिपोर्ट्स की मानें तो यहां मौजूद ज्यादातर यूरेनियम नतांज के पास पिकएक्स की पहाड़ियों के पास बनी अंडरग्राउंड न्यूक्लियर फैसिलिटी में शिफ्ट कर दिया गया, जो अब भी यहीं पर मौजूद है. पिकएक्स माउंटेन स्टोरेज को सुरंगों के जरिए नतांज यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट से जोड़ा गया है. हालांकि इसके अंदर जाने के लिए एक प्रवेश द्वार भी बनाया गया है.

पिकएक्स माउंटेन की ऊंचाई 5 हजार मीटर

इसकी तलहटी में 328 फीट नीचे यूरेनियम का स्टेजिंग एरिया बनाया गया है. इसी एरिया में ईरान ने 400 किलो संवर्धित यूरेनियम रखा है. माना जा रहा है कि अमेरिका स्पेशल ऑपरेशन चलाकर इस यूरेनियम को यहां से निकालने की तैयारी में है. अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता ईरान में मौजूद संवर्धित यूरेनियम है. जिसे ट्रंप किसी भी कीमत पर ईरान की पहुंच से दूर करना चाहता है. ताकि परमाणु खतरे को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके. ऐसे में ग्राउंड ऑपरेशन ट्रंप की मजबूरी है.

यूरेनियम हटाने का क्या है प्लान?

दरअसल एयरस्ट्राइक से सेंट्रीफ्यूज और पावर सिस्टम को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, लेकिन संवर्धित यूरेनियम को खत्म नहीं किया जा सकता. सबसे बड़ा डर ये है कि अगर यहां कोई विस्फोट होता है तो इलाके में रेडिएशन फैल जाएगा. ऐसे में अमेरिका के सामने एकमात्र विकल्प सैनिकों को भेजकर यूरेनियम यहां से हटाना है.

इसीलिए माना जा रहा है कि अमेरिका भीषण एयरस्ट्राइक की आड़ में यूरेनियम निकालने के लिए स्पेशल ऑपरेशन शुरू कर सकता है. ताकि यूरेनियम भी ईरान से बाहर लाया जा सके और अमेरिकी सैनिक जमीनी जंग में भी नहीं फंसें.

ईरान पर सबसे बड़ा प्रहार

एक तरफ अमेरिका ईरान पर सबसे बड़ा प्रहार कर सकता है. तो वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने ईरान में अपने तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर को अरब भेजने की तैयारी कर ली है. USS जॉर्ज डब्ल्यू बुश अमेरिका के नॉरफॉक नेवल स्टेशन पर मौजूद है. जहां से ये उत्तरी अटलांटिक होते हुए पहले जिब्राल्टर स्ट्रेट पहुंचेगा.

जिब्राल्टर स्ट्रेट से होते हुए USS बुश भूमध्य सागर में आएगा. जहां इसे इजराइली पोर्ट के पास तैनात किया जा सकता है. क्योंकि यहां मौजूद USS जेराल्ड फोर्ड को लाल सागर के लिए भेज दिया गया है. ये स्वेज कैनाल पार कर लाल सागर में दाखिल हो चुका है. जहां से जल्द यमन के पास तैनात होगा.

लाल सागर में तैनात होगा USS बुश

हालांकि रिपोर्ट्स में ये भी दावा है कि USS बुश को इजराइल पोर्ट की जगह लाल सागर में भेजा जा सकता है. जहां इसे हूती को तबाह करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और USS जेराल्ड फोर्ड लाल सागर की जगह ईरान के विरुद्ध USS लिंकन के साथ मोर्चा संभालेगा. कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो इस तैनाती की वजह लिंकन पर हुए ईरान के हमले हैं. जिन्हें ईरानी वॉर कमांडर सफल बता रहे हैं. हालांकि अमेरिका लगातार इसका खंडन कर रहा है.

लेकिन अमेरिका का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर अरब के लिए रवाना करना ईरानी दावों की पुष्टि करता नजर आता है. कुछ रिपोर्ट्स कि मानें तो USS जॉर्ड डब्ल्यू बुश लाल सागर में कमान संभालेगा तो जेराल्ड फोर्ड को ईरान के पास तैनात किया जाएगा. जहां वो USS अब्राहम लिंकन की जगह लेगा.

अमेरिका बेहद ताकतवर

ईरान युद्ध में भले अमेरिका बेहद ताकतवर नजर आता है. लेकिन अभी तक जंग में वैसा कुछ नहीं हुआ, जिसकी योजना ट्रंप ने तैयार की थी. ईरान जहां खामेनेई की मौत के बाद भी सरेंडर करने के लिए तैयार नहीं है. वहीं अमेरिका को सैन्य मोर्च पर चोट भी दे रहा है और यही ट्रंप की सबसे बड़ी टेंशन है. जिसे खत्म करने का लक्ष्य केंद्र में रखकर आज रात अमेरिकी सेना फुल एंड फाइनल प्रहार करेगी.

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