ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद पूरा मिडिल ईस्ट जंग के मैदान में बदल गया है. अमेरिका के हमले और सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद ईरान अपनी पूरी ताकत से अरब देशों और मिडिल ईस्ट में स्थित सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है. अमेरिकी सैन्य अड्डों को दहला रहा है. ईरान की इस शक्ति के पीछे रूस-चीन को माना जा रहा है. अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि रूस और चीन जंग में ईरान की मदद कर रहे हैं. अब डर है कि अरब में रूस-चीन-ईरान का गठबंधन तीसरे विश्वयुद्ध की वजह बन सकता है.
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद से ईरान आक्रामक है और इसकी बड़ी वजह चीन और रूस है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अरब में सुपरपावर के विरुद्ध ईरान, रूस और चीन के गठबंधन ने मिलकर काम करना शुरू कर दिया है और इसमें सबसे आगे रूस है.
अमेरिकी खुफिया विभाग के हाथ ऐसे सबूत लगे हैं, जो इस तरफ इशारा करते हैं कि रूस जंग में ईरान को मदद दे रहा है. वो अपनी सैटेलाइट्स के जरिए अमेरिकी टारगेट्स की सटीक लोकेशन ईरानी वॉर कमांडर्स तक पहुंचा रहा है.
ईरान की मदद कर रहा है रूस
अमेरिकी खुफिया विभाग के हवाले से वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस जंग शुरू होने के बाद से ईरान की मदद कर रहा है. अमेरिकी सेना को निशाना बनाने के लिए खुफिया जानकारी दी जा रही है. मिडिल ईस्ट में अमेरिकी युद्धपोतों, एयरक्राफ्ट और दूसरी सैन्य संपत्तियों की सटीक लोकेशन भेज रहा है.
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यही वजह है कि अमेरिका के भीषण हमलों के बाद भी ईरान समंदर में आक्रामक है. माना जा रहा है कि USS अब्राहम लिंकन पर हमले भी रूस की मदद से किए गए. हालांकि अब्राहम लिंकन से ईरान की कोई मिसाइल टकराई. अमेरिका लगातार इसका खंडन कर रहा है, लेकिन होर्मुज इस वक्त ईरान के कब्जे में है. जिसकी पुष्टि वहां से आ रही तस्वीरें करती हैं.
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कब्जा
ऐसी तस्वीरें आई हैं कि आग की लपटें से घिरा एक तेल टैंकर जो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहा था. दावा किया गया है कि ईरान ने ड्रोन हमले किए, जिसके बाद इसमें आग लग गई. हमले के वक्त तेल टैंकर ओमान तट से करीब 12 किमी की दूरी पर मौजूद था. बीते दो दिनों में ईरान ऐसे दो तेल टैंकर तबाह कर चुका है.
इसके अलावा ईरान ने कुवैत के तट पर मौजूद एक तेल टैंकर पर भी हमला किया. ये अमेरिकी झंडे वाला तेल टैंकर था. दावा किया गया है कि हमले के बाद तेल टैंकर में आग लग गई.
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वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पुतिन की मदद से ईरान समंदर में आक्रामक है और ईरान जंग तीसरे विश्वयुद्ध में बदलने का डर कई गुना बढ़ चुका है. इस आशंका को चीन ने भी बढ़ा दिया है. अमेरिकी खुफिया जानकारी से संकेत मिलता है कि ईरान को चीन वित्तीय सहायता, हथियारों के पार्ट्स और मिसाइल उत्पादन से जुड़ी मदद भेजने की तैयारी कर रहा है. ये मदद रूस के रास्ते भेजी जा सकती है.
पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात
इधर ईरान जंग के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने फोन पर वार्ता की. दावा किया गया है कि इस वार्ता का मुद्दा ईरान युद्ध और अमेरिका था. इस वार्ता के कुछ देर बाद दिमित्री मेदवेदेव ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा.
इस पोस्ट में लिखा कि अरब देशों ने अमेरिकी सैन्य अड्डों को अपनी धरती पर स्थापित होने दिया. उन्होंने भोलेपन में उनसे सुरक्षा की उम्मीद की, ‘बिलकुल नहीं! अमेरिका उनका इस्तेमाल करता है’ ‘और बदले में सिर्फ एक देश की रक्षा करता है. सोच-समझकर फैसला करें कि क्या आपको वाकई अमेरिकी सैन्य अड्डों की जरूरत है. वो सुरक्षा नहीं, बल्कि खतरा है.
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साफ है, रूस जहां ईरान की मदद कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ अरब देशों को अमेरिका के खिलाफ भड़काने की कोशिश में है. ऐसे में ईरान युद्ध अगर लंबा खिंचता है तो इसके तीसरा विश्व युद्ध में बदलने का डर कई गुना बढ़ जाएगा.



































