किसी भी व्यक्ति के जीवन में कैरियर का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण निर्णय होता है और अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि वे नौकरी करें या व्यापार। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यापार में अपार धन लाभ और स्वतंत्रता होती है, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह से जातक की जन्म कुंडली में मौजूद ग्रहयोगों और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती है। वास्तु और ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि व्यापारिक सफलता के लिए कुंडली में 'बुध' ग्रह का बलवान होना सबसे अनिवार्य शर्त है, क्योंकि बुध को बुद्धि और व्यापार का नैसर्गिक प्रतिनिधित्व प्राप्त है। यदि बुध शुभ स्थिति में है, तो जातक के भीतर व्यापारिक सूझबूझ और निर्णय लेने की क्षमता अद्भुत होती है। पत्रकारिता की दृष्टि से देखें तो आज के प्रतिस्पर्धी दौर में लोग निवेश तो कर देते हैं, लेकिन सही दिशा न होने के कारण घाटा उठाते हैं। कुंडली का सातवां भाव बाजार और दैनिक व्यापार को दर्शाता है, जबकि दसवां भाव बड़े अनुबंधों और कॉन्ट्रैक्ट स्तर के कार्यों का प्रतिनिधित्व करता है। इन दोनों भावों का विश्लेषण यह स्पष्ट कर देता है कि जातक को किस वस्तु का कारोबार करना चाहिए जिससे उसे लाभ और तरक्की मिले।
उदाहरण के लिए यदि हम मिथुन लग्न की कुंडली का विश्लेषण करें, तो यहाँ सातवें और दसवें दोनों ही व्यापारिक भावों का स्वामी 'गुरु' होता है। यदि गुरु कुंडली के पांचवें भाव के स्वामी 'शुक्र' के साथ शुभ संबंध बनाकर बैठा हो, तो यह एक शक्तिशाली राजयोग का निर्माण करता है। ऐसी स्थिति में यदि धन भाव और लाभ भाव भी मजबूत हों, तो जातक को कॉस्मेटिक, कपड़ों का व्यापार, बुक स्टॉल या अपना स्वयं का शिक्षण संस्थान खोलने में जबरदस्त सफलता मिलती है। इतना ही नहीं, शुक्र का प्रभाव होने के कारण ऐसा व्यक्ति फिल्म उद्योग में निर्माता के रूप में भी नाम और पैसा कमा सकता है। यह रोचक तथ्य है कि हर ग्रह किसी न किसी विशेष वस्तु या कार्य का स्वामी होता है। यदि कुंडली में मंगल प्रभावी है तो लोहा या निर्माण कार्य, शुक्र प्रभावी है तो विलासिता और कपड़े, और यदि चंद्रमा का प्रभाव है तो खाद्य पदार्थों का व्यापार लाभदायक सिद्ध होता है। व्यापार की शुरुआत हमेशा ग्रहों के अनुकूल समय और महादशा को देखकर ही करनी चाहिए ताकि परिश्रम का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

































