ट्रंप टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज नहीं व्हाइट हाउस ने वैकल्पिक रास्तों की पूरी तैयारी की

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वॉशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर जारी कानूनी और राजनीतिक बहस के बीच शुक्रवार को यह स्पष्ट हो गया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट आज इस मामले में कोई फैसला सुनाने वाला नहीं है। व्हाइट हाउस के शीर्ष आर्थिक सलाहकार और नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक केविन हैसेट ने संकेत दिया है कि प्रशासन को अपने पक्ष में फैसले की उम्मीद है, लेकिन यदि फैसला प्रतिकूल भी जाता है तो सरकार के पास वैकल्पिक कानूनी उपाय पूरी तरह तैयार हैं। इस बयान के बाद ट्रंप प्रशासन की रणनीति और अमेरिकी व्यापार नीति एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।

सीएनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में केविन हैसेट ने कहा कि व्हाइट हाउस को भरोसा है कि वह इस कानूनी लड़ाई में जीत दर्ज करेगा, लेकिन सरकार ने हर संभावित स्थिति के लिए पहले से तैयारी कर रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला नहीं देता है, तो भी ऐसे कई अन्य कानूनी अधिकार और उपाय मौजूद हैं, जिनके जरिए अमेरिका उन व्यापार समझौतों और नीतिगत लक्ष्यों तक “लगभग तुरंत” पहुंच सकता है, जिनके लिए टैरिफ लगाए गए हैं। हैसेट के इस बयान को यह संकेत माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन किसी भी हाल में अपनी आक्रामक व्यापार नीति से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

हैसेट ने यह भी बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर इस पूरे मामले में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और वैकल्पिक योजनाओं को अंतिम रूप देने में मदद कर रहे हैं। उनके अनुसार, गुरुवार रात को व्हाइट हाउस में शीर्ष अधिकारियों के साथ एक लंबी बैठक हुई, जिसमें इस बात पर चर्चा की गई कि यदि सुप्रीम कोर्ट इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए टैरिफ के खिलाफ फैसला देता है, तो अगला कदम क्या होगा। यह वही कानून है, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय आपात स्थिति का हवाला देते हुए कई देशों पर टैरिफ लगाए हैं।

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केवल एक आपराधिक मामले से जुड़ा फैसला सुनाया और ट्रंप टैरिफ से संबंधित किसी भी याचिका पर कोई निर्णय नहीं दिया। इससे यह साफ हो गया कि इस मुद्दे पर फैसला अभी टल गया है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इसे अस्थायी स्थिति बताते हुए कहा है कि प्रशासन पूरी तरह आश्वस्त है और किसी भी कानूनी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

इस बीच, अमेरिका के शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला। शुक्रवार सुबह के कारोबार में प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। एसएंडपी 500 इंडेक्स को ट्रैक करने वाला ईटीएफ बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, वहीं नैस्डैक आधारित टेक शेयरों में भी मजबूती रही। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में भी हल्की तेजी दर्ज की गई। शेयर बाजार में इस तेजी को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि निवेशकों को फिलहाल ट्रंप टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से किसी बड़े नकारात्मक झटके की आशंका नहीं है।

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टैरिफ को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप का रुख लगातार सख्त रहा है। इसी सप्ताह उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका को जल्द ही 600 अरब डॉलर से अधिक की टैरिफ आय प्राप्त होगी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि यह राशि पहले ही वसूली जा चुकी है या शीघ्र ही मिलने वाली है, लेकिन उनके अनुसार मुख्यधारा का मीडिया इस मुद्दे पर चर्चा नहीं कर रहा क्योंकि वह देश और प्रशासन के खिलाफ पूर्वाग्रह रखता है। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले को देश के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक करार दिया है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि टैरिफ का उद्देश्य केवल राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि अमेरिका के व्यापारिक हितों की रक्षा करना और उन देशों के खिलाफ सख्त कदम उठाना है, जो अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त हैं। व्हाइट हाउस का तर्क है कि इन टैरिफ के जरिए अमेरिका ने कई देशों के साथ बेहतर व्यापार समझौते किए हैं और घरेलू उद्योगों को मजबूती मिली है।

दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि टैरिफ से वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ी है और अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ पड़ा है। यही कारण है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है और इसके कानूनी पहलुओं पर बारीकी से बहस हो रही है। इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार को लेकर भी संवैधानिक सवाल उठाए गए हैं।

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केविन हैसेट ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि यदि अदालत से अपेक्षित फैसला नहीं भी मिलता है, तो प्रशासन के पास अन्य कानूनी रास्ते हैं, जिनके जरिए वही परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उनके अनुसार, इन वैकल्पिक उपायों के जरिए अमेरिका अपने व्यापारिक सौदों और टैरिफ नीति को जारी रख सकता है, जिससे राष्ट्रीय हितों की रक्षा हो सके।

इस पूरे घटनाक्रम पर वैश्विक स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। अमेरिका की टैरिफ नीति का असर केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने वाले समय में वैश्विक व्यापार संबंधों की दिशा तय कर सकता है।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के टलने से ट्रंप प्रशासन को रणनीतिक रूप से समय मिल गया है। व्हाइट हाउस इस समय आत्मविश्वास के साथ यह संदेश दे रहा है कि चाहे अदालत का फैसला जो भी हो, अमेरिकी व्यापार नीति को लागू करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त कानूनी और नीतिगत विकल्प मौजूद हैं। यही वजह है कि टैरिफ को लेकर जारी यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के अंतिम रुख पर न केवल अमेरिकी राजनीति, बल्कि वैश्विक बाजारों की भी निगाहें टिकी हुई हैं।

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