शीतला सप्तमी पर इस बार नहीं जलेगा चूल्हा बासी भोजन से होगा निरोगी काया का संकल्प

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शीतला सप्तमी – 10 मार्च 2026 (मंगलवार)

शीतला अष्टमी / बसौड़ा – 11 मार्च 2026 (बुधवार) 

भोजन कब बनाएं:

*9 मार्च 2026 (सोमवार) को शाम या रात में अगले दिन के लिए पूरी, पकवान, चावल, हलवा आदि भोजन बनाकर रख लिया जाता है।

देशभर में चैत्र मास की शुरुआत के साथ ही लोक आस्था और स्वास्थ्य के संगम का प्रतीक 'शीतला सप्तमी' और 'बसौड़ा' पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आगामी 10 मार्च 2026, मंगलवार को शीतला सप्तमी और 11 मार्च को शीतला अष्टमी यानी बसौड़ा का महापर्व मनाया जाएगा। इस वर्ष यह त्योहार विशेष धार्मिक संयोगों के बीच आ रहा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पक्ष है, जिसमें अग्नि का त्याग कर ठंडे भोजन को प्राथमिकता दी जाती है। मान्यता है कि इस दिन घर में चूल्हा जलाना पूरी तरह वर्जित होता है, इसलिए परंपरा के अनुसार 9 मार्च की रात को ही घरों में हलवा, पूरी, मीठे चावल और दही बड़े जैसे विभिन्न पकवान तैयार कर लिए जाएंगे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला माता स्वच्छता और शीतलता की अधिष्ठात्री देवी हैं। शीतला सप्तमी के दिन तड़के स्नान के बाद माता को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है। इस पर्व को 'बसौड़ा' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें 'बासी' भोजन का ही महत्व होता है। पूजा के दौरान माता को जल, रोली, अक्षत और विशेष रूप से नीम के पत्ते अर्पित किए जाते हैं, जो आयुर्वेद में संक्रमण रोधी माने गए हैं। पूजा के पश्चात घर के सभी सदस्य एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन ही प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से फलदायी है, बल्कि कुंडली में राहु, केतु, मंगल और चंद्र से जुड़े दोषों को शांत करने के लिए भी अमोघ उपाय माना जाता है।

चिकित्सीय दृष्टिकोण से भी इस परंपरा का गहरा महत्व है। ऋतु परिवर्तन के इस दौर में जब गर्मी का आगमन होता है, तब शरीर को चेचक, त्वचा रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए आयुर्वेद में ठंडे भोजन और नीम के प्रयोग की सलाह दी गई है। शीतला माता का स्वरूप हमें स्वच्छता और शीतल आचरण का संदेश देता है। मान्यता है कि जिस घर में विधि-विधान से यह पूजा की जाती है, वहां साल भर सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है। इस वर्ष भी शीतला सप्तमी पर मंदिरों में विशेष भीड़ होने की संभावना है, जिसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर कमेटियों ने अभी से व्यवस्थाएं दुरुस्त करना शुरू कर दिया है। लोग अपने घरों को स्वच्छ कर माता के स्वागत की तैयारी में जुट गए हैं ताकि नकारात्मकता दूर हो और आरोग्य का वरदान प्राप्त हो सके।

*घर में चूल्हा कब न जलाएं:

10 मार्च 2026 (शीतला सप्तमी) के दिन घर में चूल्हा या गैस नहीं जलाते।

*इसी कारण इस पर्व को बसोड़ा (बासी भोजन का पर्व) भी कहा जाता है।

*बासा/ठंडा भोजन कब खाएं:

10 या 11 मार्च को शीतला माता की पूजा के बाद एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

पूजा विधि:

सुबह स्नान कर शीतला माता की पूजा करें।

*माता को ठंडा जल, रोली, अक्षत, नीम के पत्ते और बासी भोजन का भोग लगाएं।

*शीतला माता की कथा और आरती करें।

व्रत का लाभ:

इस व्रत से चेचक, त्वचा रोग और संक्रमण से रक्षा की मान्यता है।

*घर में स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

*किन ग्रहों की शांति होती है:

ज्योतिष के अनुसार इस व्रत से मुख्य रूप से

*राहु  केतु,मंगल और चंद्र से जुड़े दोष शांत होते हैं।

विशेष मान्यता:

*इस दिन नीम का प्रयोग, स्वच्छता और ठंडे भोजन का भोग करने से रोग और नकारात्मकता दूर होती है. 

*पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु*(9893280184)

मां कामाख्या साधक जन्म कुंडली विशेषज्ञ वास्तु शास्त्री

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