मशहूर रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया के पांचवें सीजन में उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया जब शो के जजों ने एक स्किनकेयर ब्रांड के संस्थापक की डिग्री और दावों पर गंभीर सवाल उठाते हुए उनकी क्लास लगा दी। 'ल्यूइसिया वेलनेस' (Lewisia Wellness) के संस्थापक मनोज दास, जो खुद को एक एरोमाथेरेपिस्ट और नेचुरल थेरेपिस्ट बताते हैं, शो के मंच पर खुद को 'डॉक्टर' के तौर पर पेश कर रहे थे। हालांकि, शो के जज अनुपम मित्तल, नमिता थापर और अमन गुप्ता को उनके दावों में सच्चाई नजर नहीं आई और उन्होंने सार्वजनिक मंच पर उनकी डिग्री की वैधता को चुनौती दी। सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें जज अनुपम मित्तल मनोज दास को उनके 'भ्रामक' दावों और सोशल मीडिया पर डाली गई 'प्रोवोकेटिव' यानी उत्तेजक रील्स के लिए बुरी तरह फटकार लगाते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद मनोज दास को ऑनलाइन भारी आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने अपने इंस्टाग्राम बायो से 'डॉक्टर' शब्द हटा दिया है।
मामला तब गरमाया जब अनुपम मित्तल ने मनोज दास के बिजनेस मॉडल और मार्केटिंग के तरीकों पर सवाल उठाए। अनुपम ने कड़े लहजे में कहा कि आपका असली जादू आपके कंटेंट क्रिएशन में है न कि आपके प्रोडक्ट्स की वैज्ञानिकता में। उन्होंने मनोज पर आरोप लगाया कि उन्होंने ऐसी रील्स बनाई हैं जो बेहद उत्तेजक और भ्रामक हैं और केवल उन्हीं के वायरल होने के दम पर उनका बिजनेस चल रहा है। अनुपम के कहने पर जब मनोज के वीडियो शो में दिखाए गए, तो मित्तल ने उनके दावों को पूरी तरह 'निराधार' करार दिया। इसके बाद बहस का केंद्र मनोज दास द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला 'डॉक्टर' का शीर्षक बन गया। अनुपम मित्तल ने सीधे तौर पर पूछा कि क्या एक एरोमाथेरेपिस्ट या नेचुरल थेरेपिस्ट को कानूनी रूप से अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' लगाने की अनुमति है। जब मनोज ने बचाव करते हुए कहा कि एरोमाथेरेपी में बैचलर डिग्री करने के बाद यह शीर्षक लगाया जा सकता है, तो अनुपम मित्तल ने उन्हें खुली चुनौती दे दी। मित्तल ने कहा कि अगर आप यह साबित कर दें कि इस डिग्री के बाद डॉक्टर लगाया जा सकता है तो मैं अपना नाम बदल दूंगा, साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ड्यू डिलिजेंस (जांच-पड़ताल) में आपकी पोल खुल जाएगी।
नमिता थापर और अमन गुप्ता ने भी इस मामले में नाराजगी जाहिर की। नमिता, जो खुद स्वास्थ्य क्षेत्र (फार्मास्युटिकल) से जुड़ी हैं, ने स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर गंभीरता बरतने की सलाह दी। जजों का मानना था कि इस तरह के आधे-अधूरे ज्ञान और बिना डॉक्टरेट डिग्री के खुद को डॉक्टर बताना जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी मनोज दास को ट्रोल करना शुरू कर दिया, जिसके बाद भारी दबाव में आकर उन्होंने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल में बदलाव किया। इंस्टाग्राम पर 611K (6 लाख से अधिक) फॉलोअर्स रखने वाले मनोज दास ने अब अपने बायो से 'डॉक्टर' हटा लिया है, हालांकि उनके फेसबुक यूजरनेम में अब भी 'डॉक्टर मनोज दास' लिखा नजर आ रहा है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि विवाद के बावजूद उन्होंने सभी प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पहचान को पूरी तरह अपडेट नहीं किया है।
शार्क टैंक इंडिया के इस एपिसोड ने एक बार फिर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और उनके द्वारा किए जाने वाले दावों की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि स्किनकेयर और हेयरकेयर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बिना चिकित्सकीय परामर्श के किसी भी उत्पाद को 'जादुई' बताकर बेचना ग्राहकों के लिए खतरनाक हो सकता है। मनोज दास का मामला उन सभी स्टार्टअप संस्थापकों के लिए एक सबक है जो मार्केटिंग की चमक-धमक में अपनी वास्तविक शैक्षणिक योग्यता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। अनुपम मित्तल की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने यह साफ कर दिया है कि शार्क टैंक का मंच केवल निवेश हासिल करने की जगह नहीं है, बल्कि वहां आपके नैतिकता और ईमानदारी का भी कड़ा इम्तिहान होता है। फिलहाल सोशल मीडिया पर लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि क्या केवल बायो बदलने से मनोज दास की साख वापस आएगी या उन्हें सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना होगा।

































