बेहतर नींद और तेजी से वजन घटाने के लिए थोड़े खाली पेट सोना फायदेमंद, डाइटिशियन ने बताए चौंकाने वाले तर्क

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आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर नित नए शोध और दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन हाल ही में पोषण विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई एक जानकारी ने स्वास्थ्य प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बेंगलुरु के एस्टर सीएमआई अस्पताल की क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स विभाग की प्रमुख एडविना राज सहित कई ऑनलाइन हेल्थ कोचों का मानना है कि रात को सोते समय पेट में होने वाली हल्की सी हलचल या भूख का अहसास आपके वजन घटाने के सफर का सबसे बड़ा रहस्य हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार जब आप बिस्तर पर जाते समय थोड़ा भूखा महसूस करते हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि आपका शरीर 'कैलोरी डेफिसिट' यानी कैलोरी की कमी की स्थिति में है। ऐसी स्थिति में शरीर के पास रात भर ऊर्जा के लिए अपनी जमा चर्बी (स्टोर्ड फैट) का उपयोग करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है। यह प्रक्रिया न केवल वजन कम करने में सहायक है बल्कि शरीर की आंतरिक रिकवरी के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस वैज्ञानिक तर्क के पीछे की बारीकियों को समझाते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि जब हम सोने से कुछ घंटे पहले खाना बंद कर देते हैं, तो हमारे शरीर में इंसुलिन का स्तर धीरे-धीरे गिरने लगता है। कम इंसुलिन स्तर शरीर के लिए एक संकेत की तरह काम करता है जो उसे नया फैट जमा करने के बजाय पहले से मौजूद फैट को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करता है। इतना ही नहीं, नींद के दौरान शरीर में ग्रोथ हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो फैट बर्निंग, मांसपेशियों की मरम्मत और समग्र रिकवरी में सहायता करता है। यदि हमारा शरीर भारी भोजन को पचाने में व्यस्त नहीं है, तो यह अपनी पूरी ऊर्जा शरीर की मरम्मत और नवीनीकरण में लगा पाता है। हल्के खाली पेट सोने से न केवल पाचन में सुधार होता है, बल्कि नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है क्योंकि शरीर का मेटाबॉलिज्म शांत रहता है। जो लोग इस पद्धति को अपनाते हैं, वे अक्सर अगले दिन सुबह खुद को अधिक हल्का, ऊर्जावान और बेहतर भूख नियंत्रण के साथ पाते हैं।

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डाइटिशियन एडविना राज के अनुसार सुनने में यह थोड़ा कठिन लग सकता है, लेकिन इसके पीछे संतुलन बनाना सबसे अनिवार्य है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप खुद को भूखा मारें या अत्यधिक कमजोरी महसूस करें। मुख्य उद्देश्य शरीर को उस स्थिति में लाना है जहां वह अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बाहरी भोजन के बजाय आंतरिक संसाधनों पर निर्भर हो सके। भारी डिनर करने से अक्सर शरीर को रात भर उसे पचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, जिससे नींद में खलल पड़ता है और व्यक्ति सुबह उठने पर सुस्ती या भारीपन महसूस करता है। इसके विपरीत, सोने से कम से कम दो-तीन घंटे पहले हल्का भोजन करने से शरीर को आराम करने का पर्याप्त समय मिलता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अपने शरीर की आवाज़ सुनना सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है क्योंकि अच्छी नींद का महत्व उतना ही है जितना कि एक संतुलित आहार का। यदि आप अत्यधिक भूखे हैं तो नींद आना मुश्किल हो सकता है, इसलिए 'हल्की भूख' और 'अत्यधिक भूख' के बीच का अंतर समझना जरूरी है।

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आजकल की जीवनशैली में 'लेट नाइट स्नैकिंग' या देर रात तक जागकर खाना एक आम आदत बन गई है, जो मोटापे और मेटाबॉलिज्म संबंधी बीमारियों का प्रमुख कारण है। हेल्थ कोचों का दावा है कि यदि कोई व्यक्ति रात को थोड़े खाली पेट सोने की आदत डाल लेता है, तो उसका मेटाबॉलिज्म अगले दिन सुबह अधिक सक्रिय रहता है, जिससे दिनभर स्थिर ऊर्जा बनी रहती है। जीवनशैली के इस छोटे से बदलाव से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है बल्कि यह मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता को भी बढ़ावा देता है। संक्षेप में कहें तो रात को सोते समय पेट की वह हल्की सी गुड़गुड़ाहट वास्तव में आपके शरीर की वसा जलाने की मशीन के सक्रिय होने का संकेत है। विशेषज्ञों की यह सलाह उन लोगों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है जो जिम में घंटों पसीना बहाने के बाद भी जिद्दी चर्बी से छुटकारा नहीं पा पा रहे थे। हालांकि किसी भी बड़े बदलाव से पहले अपनी व्यक्तिगत शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य इतिहास को ध्यान में रखना अनिवार्य है।

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