सबरीमला सोना चोरी कांड पर अमित शाह का केरल सरकार पर तीखा हमला निष्पक्ष जांच की मांग

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तिरुवनंतपुरम. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सबरीमला मंदिर से जुड़े सोना चोरी मामले को लेकर केरल सरकार पर तीखा हमला बोला है और इस पूरे प्रकरण की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी को सौंपने की खुली मांग की है. रविवार को यहां नव-निर्वाचित स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने आरोप लगाया कि केरल सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने में विफल रही है और राज्य के दो मंत्री भी संदेह के घेरे में हैं. उन्होंने कहा कि जब तक जांच किसी तटस्थ एजेंसी को नहीं सौंपी जाती, तब तक भारतीय जनता पार्टी पूरे केरल में आंदोलन करेगी और जनता को जागरूक करेगी.

अमित शाह ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को निशाने पर लेते हुए कहा कि सबरीमला मंदिर के कोष की रक्षा न कर पाने वाली सरकार आस्था की रक्षा कैसे कर सकती है. उन्होंने कहा कि यह चोरी केवल केरल के लोगों की आस्था का विषय नहीं है, बल्कि पूरे देश की नजर इस मामले पर टिकी हुई है. शाह ने दावा किया कि उन्होंने प्राथमिकी का अध्ययन किया है और उसमें आरोपियों को बचाने की कोशिश साफ दिखाई देती है. उन्होंने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में जानबूझकर कमजोरियां छोड़ी गई हैं ताकि दोषियों को संरक्षण मिल सके.

गृह मंत्री ने कहा कि यदि केरल में किसी पार्टी में आस्था और विश्वास की रक्षा करने की क्षमता है, तो वह केवल भाजपा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ भी निष्पक्ष जांच नहीं करा सकता, क्योंकि उसकी मिलीभगत से जुड़े सबूत भी सामने आ रहे हैं. शाह ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को नहीं सौंपी जाती, भाजपा गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चलाएगी और सरकार पर दबाव बनाएगी.

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सबरीमला सोना चोरी मामला मंदिर की पवित्र संपत्तियों से कथित तौर पर लगभग 4.54 किलोग्राम सोने की हेराफेरी से जुड़ा है. आरोप है कि मंदिर के श्रीकोविल के द्वारों और द्वारपालक प्रतिमाओं सहित कई पवित्र वस्तुओं से सोना हटाया गया. यह कथित चोरी वर्ष 2019 में सोने की परत चढ़ाने और मरम्मत के नाम पर की गई थी. 9 जनवरी 2026 को विशेष जांच दल ने इस मामले में मंदिर के वरिष्ठ तंत्री कंडारारु राजीवरु को गिरफ्तार किया. उन पर आपराधिक साजिश और अनुष्ठानिक नियमों के उल्लंघन के बावजूद सोने की वस्तुएं हटाने की मौन अनुमति देने का आरोप है.

अमित शाह ने इस मामले को लेकर सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा दोनों पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि ये दोनों गठबंधन राज्य को विभाजनकारी ताकतों से बचाने में असफल रहे हैं. शाह ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी, पीएफआई और एसडीपीआई जैसे संगठन इन दलों के वोट बैंक हैं, इसलिए इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती. उन्होंने दावा किया कि केरल को इन ताकतों से केवल भाजपा ही सुरक्षित रख सकती है.

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गृह मंत्री ने तीन तलाक समाप्त करने और वक्फ कानून में सुधार जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भाजपा ने मुस्लिम महिलाओं को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार दिलाने के लिए तीन तलाक को खत्म किया, लेकिन एलडीएफ और यूडीएफ ने इसका विरोध किया. शाह ने वक्फ बोर्ड से जुड़े मामलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एर्नाकुलम में 400 एकड़ जमीन, जो सैकड़ों ईसाई और हिंदू परिवारों की थी, उस पर कब्जे का मुद्दा गंभीर है और राज्य सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है.

शाह ने केरल के विकास मॉडल पर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य की सरकारें केवल विदेशों में काम कर रहे केरलवासियों द्वारा भेजी जाने वाली धनराशि पर निर्भर हैं. उन्होंने कहा कि संतुलित विकास के लिए यह जरूरी है कि हर नागरिक को विकास का लाभ मिले, न कि केवल प्रवासी आय पर अर्थव्यवस्था टिकी रहे. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां-जहां भाजपा और एनडीए की सरकारें हैं, वहां व्यापक और संतुलित विकास देखने को मिला है.

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गृह मंत्री ने केरल में भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का भी दावा किया. उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में भाजपा को राज्य में 11 प्रतिशत वोट मिले थे, जो 2019 में बढ़कर 16 प्रतिशत और 2024 में 20 प्रतिशत हो गए. शाह ने भरोसा जताया कि 2026 तक यह आंकड़ा 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा और केरल में भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा. उन्होंने ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं और तिरुवनंतपुरम नगर निगम में मिली सफलता को पार्टी के बढ़ते जनाधार का संकेत बताया.

अमित शाह ने एलडीएफ और यूडीएफ पर ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप लगाते हुए कहा कि इन दोनों के आपसी तालमेल ने केरल की अपार संभावनाओं को रोक दिया है. उन्होंने केरल की जनता से विकास, सुरक्षा और आस्था की रक्षा के लिए एनडीए को चुनने की अपील की. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का सपना दिखाया है और उस रास्ते में विकसित केरल की अहम भूमिका होगी.

अपने संबोधन के अंत में शाह ने कहा कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा की जीत केवल एक शुरुआत है और यह केरल में सत्ता परिवर्तन की दिशा में पहला कदम है. उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और राज्य एक नए विकास पथ पर आगे बढ़ेगा.

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