कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज उस समय एक नया और प्रचंड उबाल आ गया जब विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मनोज वर्मा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें जेल भेजने की मांग कर दी। कोलकाता की सड़कों पर एक विशाल जवाबी रैली का नेतृत्व करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने राजनीतिक सलाहकार फर्म आई-पैक (I-PAC) से जुड़े परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों से फाइलें व लैपटॉप छीनकर संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया है। अधिकारी के अनुसार, सरकारी कार्य में बाधा डालना एक गंभीर अपराध है और इसके लिए मुख्यमंत्री समेत संबंधित पुलिस अधिकारियों को सलाखों के पीछे होना चाहिए। दक्षिण कोलकाता के जादवपुर से देशप्रिया पार्क तक निकाली गई इस विरोध रैली ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के सियासी तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है।
यह पूरा विवाद 8 जनवरी की उस घटना से शुरू हुआ, जब कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के लिए ईडी की टीम आई-पैक के दफ्तर और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी कर रही थी। सुवेंदु अधिकारी का आरोप है कि इस छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अचानक वहां पहुंच गईं और उनके साथ शीर्ष पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। अधिकारी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कानून ने ईडी को तलाशी, पूछताछ और गिरफ्तारी का संवैधानिक अधिकार दिया है, लेकिन मुख्यमंत्री ने स्वयं मौके पर पहुंचकर इस कानूनी प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को जैन के आवास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ निकलते देखा गया था, जो सीधे तौर पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और जांच को प्रभावित करने की श्रेणी में आता है। सुवेंदु ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार नहीं बल्कि आई-पैक शासन कर रही है और राज्य की गरिमा को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है।
रैली के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईडी ने पहले ही कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें मुख्यमंत्री को प्राथमिक आरोपी के रूप में नामित किया गया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय एजेंसी अब इस पूरे मामले की जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने और राज्य से बाहर स्थानांतरित करने की मांग कर रही है। अधिकारी ने इस कदम का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि जब पश्चिम बंगाल में न्यायपालिका और केंद्रीय एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दिया जा रहा है, तो मामलों को राज्य से बाहर ले जाना ही एकमात्र सही विकल्प बचता है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के लीगल सेल ने शुक्रवार को समन्वित संदेशों के माध्यम से उच्च न्यायालय की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया, जिसे उन्होंने एक 'खतरनाक रुझान' करार दिया। अधिकारी ने जनता के बीच हुंकार भरते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में हराना अब उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक जिम्मेदारी है।
सुवेंदु अधिकारी, जो कभी ममता बनर्जी के करीबी सिपहसालार हुआ करते थे और 2021 में उन्हें नंदीग्राम में शिकस्त दे चुके हैं, ने इस बार भवानीपुर में भी उन्हें पटखनी देने का संकल्प दोहराया। उन्होंने मुख्यमंत्री को 'चोरों की रानी' जैसे कड़े शब्दों से संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कोयला घोटाले से जुड़ा पैसा हवाला के जरिए गोवा जैसे राज्यों में तृणमूल के चुनावी अभियान के लिए भेजा गया था। अधिकारी ने शुक्रवार को ममता बनर्जी द्वारा निकाली गई विरोध मार्च को 'कृत्रिम नाटक' बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उसमें कोई जनसमर्थन नहीं था। चंद्रकोणा में अपने काफिले पर हुए हालिया हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और इस शासन को उखाड़ फेंकने के लिए वे किसी भी संघर्ष के लिए तैयार हैं।
वर्ष 2026 के आगामी विधानसभा चुनाव का रोडमैप पेश करते हुए भाजपा नेता ने इस सरकार के 'विसर्जन' का आह्वान किया। उन्होंने वादा किया कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो राज्य कर्मचारियों को केंद्रीय दर पर महंगाई भत्ता (DA) दिया जाएगा, एसएससी (SSC) और पीएससी (PSC) के माध्यम से पारदर्शी भर्ती सुनिश्चित की जाएगी और राज्य के खजाने से लूटे गए धन की पाई-पाई वापस वसूली जाएगी। लगभग दो घंटे तक चले इस विरोध मार्च ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल की राजनीति अब केवल चुनावी नारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह केंद्रीय एजेंसियों, न्यायपालिका और संवैधानिक मर्यादाओं के इर्द-गिर्द सिमट गई है। सुवेंदु अधिकारी का यह आक्रामक रुख मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, विशेषकर तब जब राज्य की पुलिस व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कोलकाता की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब आने वाले दिनों में बंगाल की सत्ता के संघर्ष को और अधिक हिंसक और वैचारिक रूप से तीखा बनाने के संकेत दे रहा है।

































