क्रिप्टो निवेशकों के लिए सख्त केवाईसी नियम सेल्फी पेननी ड्रॉप और लोकेशन सत्यापन अनिवार्य

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नई दिल्ली. भारत में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेनदेन पर निगरानी और सख्त होने जा रही है. मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के अंतर्गत कार्यरत वित्तीय खुफिया एजेंसी ने क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए नए और कड़े केवाईसी नियम लागू करने के निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों के तहत अब क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर खाता खोलने वाले हर ग्राहक को लाइवनेस डिटेक्शन के साथ सेल्फीभौगोलिक लोकेशन का रिकॉर्ड और पेननी ड्रॉप के जरिए बैंक खाते का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा.

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल दस्तावेज अपलोड करना अब पर्याप्त नहीं माना जाएगा. एक्सचेंजों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहक वास्तविक व्यक्ति है और वह उसी स्थान से लेनदेन कर रहा है, जिसकी जानकारी उसने दी है. इसके लिए सेल्फी के साथ लाइवनेस चेक को जरूरी किया गया है, ताकि फर्जी पहचान या बॉट्स के जरिए अकाउंट खोलने पर रोक लगाई जा सके. साथ ही, ग्राहक के भौगोलिक निर्देशांक यानी जियोग्राफिकल को-ऑर्डिनेट्स को भी रिकॉर्ड करना होगा, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की ट्रैकिंग आसान हो सके.

पेननी ड्रॉप विधि के जरिए बैंक खाते के सत्यापन को भी अनिवार्य किया गया है. इस प्रक्रिया में ग्राहक के बैंक खाते में बहुत ही छोटी राशि ट्रांसफर कर यह जांचा जाता है कि खाता उसी व्यक्ति का है या नहीं. एजेंसी का मानना है कि इससे फर्जी या बेनामी खातों के जरिए होने वाले क्रिप्टो लेनदेन पर प्रभावी रोक लगेगी.

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इन निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि क्रिप्टो एक्सचेंजों को टंबलर्स, मिक्सर्स और पहचान छिपाने वाले टोकन से जुड़े लेनदेन को किसी भी स्थिति में सुविधा नहीं देनी चाहिए. ऐसे टूल्स का इस्तेमाल आमतौर पर लेनदेन की ट्रेसिंग को मुश्किल बनाने के लिए किया जाता है, जिसका उपयोग अवैध गतिविधियों में होने की आशंका रहती है. एजेंसी का कहना है कि इन माध्यमों से धनशोधन और आतंकी फंडिंग के जोखिम बढ़ जाते हैं.

इसके अलावा, नए निर्देश इनिशियल कॉइन ऑफरिंग (ICO) और इनिशियल टोकन ऑफरिंग (ITO) को भी हतोत्साहित करते हैं. ये प्रक्रियाएं शेयर बाजार में होने वाले आईपीओ की तरह होती हैं, जिनके जरिए नए टोकन जारी कर निवेश जुटाया जाता है. एजेंसी के अनुसार, इन ऑफरिंग्स में निवेशकों के हितों और पारदर्शिता को लेकर कई बार गंभीर सवाल खड़े होते हैं, इसलिए एक्सचेंजों को ऐसे ऑफर से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है.

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सरकार का मानना है कि भारत में क्रिप्टो बाजार तेजी से बढ़ा है और इसके साथ ही जोखिम भी बढ़े हैं. डिजिटल संपत्तियों के जरिए होने वाले फ्रॉड, साइबर अपराध और अवैध फंड ट्रांसफर के मामलों ने नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है. इन्हीं कारणों से अब क्रिप्टो एक्सचेंजों को पारंपरिक वित्तीय संस्थानों की तरह सख्त केवाईसी और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का पालन करना होगा.

क्रिप्टो उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि इन नियमों से प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ेगी और सिस्टम में पारदर्शिता आएगी. हालांकि, कुछ एक्सचेंजों को यह भी डर है कि अत्यधिक सख्ती से नए यूजर्स के लिए ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया जटिल हो सकती है. इसके बावजूद सरकार का रुख साफ है कि यूजर सुविधा से ज्यादा प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था की शुचिता को दी जाएगी.

वित्तीय खुफिया एजेंसी ने यह भी निर्देश दिया है कि क्रिप्टो एक्सचेंजों को संदिग्ध लेनदेन की नियमित रिपोर्टिंग करनी होगी और जरूरत पड़ने पर एजेंसियों को पूरा सहयोग देना होगा. डेटा स्टोरेज और रिकॉर्ड-कीपिंग से जुड़े नियमों को भी मजबूत किया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी जांच में जरूरी जानकारी तुरंत उपलब्ध कराई जा सके.

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भारत में क्रिप्टो को लेकर नियामक ढांचा अभी भी विकसित हो रहा है. एक ओर सरकार डिजिटल नवाचार को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहती, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना भी जरूरी माना जा रहा है कि क्रिप्टो का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए न हो. नए केवाईसी निर्देश इसी संतुलन को साधने की कोशिश के रूप में देखे जा रहे हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में क्रिप्टो निवेशकों को बैंकिंग और शेयर बाजार की तरह सख्त नियमों के तहत काम करना पड़ेगा. इससे अल्पकाल में भले ही कुछ असुविधा हो, लेकिन लंबे समय में इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और बाजार अधिक सुरक्षित बनेगा.

कुल मिलाकर, सेल्फी, पेननी ड्रॉप और लोकेशन सत्यापन जैसे नए प्रावधान यह संकेत देते हैं कि भारत में क्रिप्टो सेक्टर अब अनियमित क्षेत्र नहीं रहेगा. सरकार की मंशा साफ है कि डिजिटल करेंसी के बढ़ते प्रभाव के साथ-साथ उसके जोखिमों पर भी कड़ी नजर रखी जाए, ताकि देश की वित्तीय सुरक्षा और नागरिकों के हितों की रक्षा की जा सके.

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