सचेत मूवमेंट से दर्द से गतिशीलता की ओर बढ़ने का नया मंत्र, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया लाइफस्टाइल बदलने का रास्ता

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आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती निष्क्रियता, लंबे समय तक बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और गतिशीलता से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि साधारण लेकिन सचेत तरीके से किए गए शारीरिक मूवमेंट न केवल जोड़ों के दर्द को कम कर सकते हैं बल्कि शरीर की गतिशीलता को लंबे समय तक बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिटनेस और वेलनेस विशेषज्ञों के अनुसार नियमित और नियंत्रित व्यायाम शरीर की संरचना को मजबूत बनाता है और कई गंभीर बीमारियों से बचाव में भी मदद करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए अत्यधिक भारी या कठिन व्यायाम की आवश्यकता नहीं होती बल्कि हल्के और संतुलित मूवमेंट भी शरीर को पर्याप्त लाभ पहुंचा सकते हैं। जब शरीर के जोड़ों, मांसपेशियों, हड्डियों और तंत्रिकाओं के बीच समन्वित गतिविधि होती है तो रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। नियमित शारीरिक गतिविधि से शरीर में रक्त, लसीका द्रव और अन्य जैविक तरल पदार्थों का प्रवाह बेहतर होता है जिससे जोड़ों के ऊतकों और कार्टिलेज को प्राकृतिक रूप से लुब्रिकेशन मिलता है और दर्द की संभावना कम होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सप्ताह में कम से कम दो बार जल में किए जाने वाले व्यायाम शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकते हैं। पानी में किए जाने वाले व्यायाम शरीर पर कम दबाव डालते हैं और जोड़ों को सुरक्षित रखते हैं। इसमें पानी में पैर फैलाने, किकिंग मूवमेंट, फ्रीस्टाइल और बैक स्ट्रोक जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इसके अलावा पानी में आगे-पीछे या साइड में चलना भी जोड़ों की लचक और मांसपेशियों की मजबूती बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

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विशेषज्ञों के अनुसार शरीर के विभिन्न हिस्सों के लिए अलग-अलग प्रकार के व्यायाम करना आवश्यक होता है। शरीर के संतुलन और गतिशीलता में कूल्हों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि कूल्हे शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से को जोड़ते हैं। मजबूत कूल्हे न केवल खेल और फिटनेस गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन में मदद करते हैं बल्कि चोट से बचाव और दैनिक कार्यों को सहज बनाने में भी सहायक होते हैं। कूल्हों की मजबूती के लिए गोलाकार मूवमेंट, स्क्वाट्स, क्लैमशेल और लंज जैसे व्यायाम अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं।

क्लैमशेल व्यायाम विशेष रूप से कूल्हे की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इस व्यायाम में व्यक्ति साइड में लेटकर घुटनों को मोड़ता है और पैरों को जोड़कर ऊपर वाले घुटने को धीरे-धीरे ऊपर उठाता है। यह व्यायाम कूल्हों की स्थिरता बढ़ाने और दर्द को कम करने में सहायक माना जाता है। इसी प्रकार लंज व्यायाम कूल्हों के फ्लेक्सर मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ शरीर के संतुलन और लचीलापन बढ़ाने में मदद करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कूल्हों की कमजोरी का असर घुटनों और टखनों पर भी पड़ सकता है। इसलिए शरीर के इन हिस्सों को मजबूत बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होता है। घुटने शरीर के लिए आधार का काम करते हैं और चलने, बैठने, उठने और सीढ़ियां चढ़ने जैसे दैनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। घुटनों को मजबूत बनाए रखने के लिए कम प्रभाव वाले व्यायाम और हल्की स्ट्रेचिंग बेहद लाभकारी मानी जाती है।

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घुटनों की मजबूती के लिए हैमस्ट्रिंग और क्वाड्रिसेप्स स्ट्रेचिंग, हाफ स्क्वाट्स और काफ लिफ्ट जैसे व्यायाम उपयोगी माने जाते हैं। इसके अलावा एड़ी और पिंडली की स्ट्रेचिंग भी घुटनों की गतिशीलता को बेहतर बनाती है। इस स्ट्रेचिंग के दौरान दीवार के सहारे एक पैर पीछे ले जाकर शरीर को आगे झुकाया जाता है जिससे पिंडली की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और लचीलापन बढ़ता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पीठ की मजबूती भी शरीर की गतिशीलता के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। पीठ से जुड़े व्यायाम शरीर के समन्वित मूवमेंट को बनाए रखने में मदद करते हैं। पीठ के लिए लेटकर किए जाने वाले व्यायाम सबसे प्रभावी माने जाते हैं। इसमें घुटनों को मोड़कर शरीर को एक ओर झुकाना और हाथों को फैलाकर सिर को विपरीत दिशा में घुमाना शामिल है। यह व्यायाम रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और पीठ के दर्द को कम करने में सहायक होता है।

इसके अलावा पीठ के लिए ब्रिज पोज भी बेहद लाभकारी माना जाता है। इस व्यायाम में व्यक्ति पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ता है और पैरों के सहारे शरीर को ऊपर उठाता है। यह व्यायाम पीठ और कूल्हों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है और शरीर की स्थिरता बढ़ाता है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित व्यायाम के साथ संतुलित आहार, सही तरीके से सांस लेने की तकनीक, पर्याप्त नींद और ध्यान जैसी गतिविधियां शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि व्यक्ति अपने जीवन में इन सभी आदतों को शामिल करता है तो कई बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है और कुछ मामलों में उन्हें उलटने की संभावना भी बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहती बल्कि इसका प्रभाव समाज और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। स्वस्थ और सक्रिय जनसंख्या कार्यक्षमता बढ़ाती है, स्वास्थ्य खर्च को कम करती है और आर्थिक विकास को गति देती है। सार्वजनिक स्वास्थ्य किसी भी देश की मानव पूंजी का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और यह शिक्षा और कौशल विकास जितना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

कुल मिलाकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सचेत और संतुलित मूवमेंट जीवन को दर्द से गतिशीलता की ओर ले जाने का प्रभावी उपाय साबित हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि न केवल शरीर को मजबूत बनाती है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती है। आधुनिक जीवनशैली में यदि लोग छोटी-छोटी शारीरिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें तो वे लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

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