जॉमेटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल को मिले 8 हजार भावनात्मक ईमेल,सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप

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जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल इन दिनों सोशल मीडिया और कॉर्पोरेट जगत में चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। पूर्व कर्मचारियों को कंपनी में दोबारा जुड़ने का खुला निमंत्रण देने के बाद उन्हें महज कुछ दिनों के भीतर लगभग 8 हजार ईमेल प्राप्त हुए हैं। इन ईमेल्स को लेकर खुद गोयल ने भावुक प्रतिक्रिया दी और बताया कि ज्यादातर संदेश भावनाओं और पुराने अनुभवों से भरे हुए हैं, जिसने उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया है।

दीपिंदर गोयल ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्हें मिले कुल ईमेल में करीब 4 हजार ईमेल ऐसे लोगों के हैं जो पहले जोमैटो की पैरेंट कंपनी ‘इटरनल’ का हिस्सा रह चुके हैं। वहीं बाकी 4 हजार ईमेल ऐसे लोगों के हैं जिन्होंने कभी कंपनी में काम नहीं किया लेकिन अब कंपनी से जुड़ने की इच्छा जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी प्रतिक्रिया की उन्हें उम्मीद नहीं थी और यह कंपनी के प्रति लोगों के भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।

गोयल ने बताया कि कई ईमेल ऐसे हैं जिनमें पूर्व कर्मचारियों ने अपने अनुभव, संघर्ष और कंपनी के साथ बिताए गए समय की कहानियां साझा की हैं। उन्होंने कहा कि इन संदेशों में कई वर्षों का इतिहास और संदर्भ छिपा हुआ है, जिसे समझना आसान नहीं है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान टीम के कई सदस्य उन पुराने कर्मचारियों और उनकी परिस्थितियों से परिचित नहीं हैं जिन्होंने वर्षों पहले कंपनी छोड़ी थी।

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दीपिंदर गोयल ने यह भी कहा कि कंपनी अब अपने विकास के महत्वपूर्ण दौर में है और इतने बड़े स्तर पर आए संदेशों को पढ़ना और उनका जवाब देना किसी एक व्यक्ति के लिए आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी ईमेल पढ़ने में समय लगेगा क्योंकि हर संदेश में अलग कहानी और भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

हाल ही में कंपनी के सीईओ पद से इस्तीफा देने वाले गोयल ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत रूप से हर ईमेल को पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 8 हजार ईमेल का जवाब तुरंत देना संभव नहीं है। इसी वजह से उन्होंने उन पूर्व कर्मचारियों से खास अपील की जो उनके साथ सीधे काम कर चुके हैं।

गोयल ने ऐसे लोगों से कहा कि यदि उन्होंने उन्हें ईमेल किया है और जवाब का इंतजार कर रहे हैं तो वे उनका नंबर ढूंढकर सीधे व्हाट्सएप पर संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरीके से पुराने साथियों से दोबारा जुड़ना अधिक आसान और तेज हो सकता है।

दरअसल दीपिंदर गोयल ने पिछले सप्ताह पूर्व कर्मचारियों के लिए एक भावनात्मक संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने उन्हें दोबारा कंपनी से जुड़ने का खुला निमंत्रण दिया था। उन्होंने कहा था कि कंपनी के इतिहास में ऐसे मौके भी आए जब सभी कर्मचारियों को सही माहौल या नेतृत्व नहीं मिल पाया, लेकिन कई लोगों ने कंपनी में काम करते हुए अच्छा अनुभव भी प्राप्त किया।

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उन्होंने अपने संदेश में साफ कहा था कि यदि किसी पूर्व कर्मचारी को लगता है कि कंपनी के दरवाजे उनके लिए बंद हो चुके हैं या वह यह सोचकर संपर्क नहीं कर रहे हैं कि पुराने मतभेद अभी भी बने हुए हैं, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। गोयल ने कहा कि वह अतीत को लेकर किसी तरह की नाराजगी नहीं रखते और चाहते हैं कि पुराने साथी दोबारा कंपनी का हिस्सा बनें।

गोयल का मानना है कि कंपनी के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए ऐसे लोगों की जरूरत है जो पहले संगठन का हिस्सा रह चुके हैं और कंपनी की कार्य संस्कृति को समझते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मचारी जो कंपनी छोड़कर आगे बढ़ चुके हैं और अब अनुभव लेकर वापस आना चाहते हैं, वे संगठन को और मजबूत बना सकते हैं।

कॉर्पोरेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी कंपनी के संस्थापक द्वारा इस तरह पूर्व कर्मचारियों को खुले तौर पर वापस बुलाना बेहद दुर्लभ कदम माना जाता है। यह कदम न केवल कंपनी के प्रति कर्मचारियों के भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करता है बल्कि संगठनात्मक संस्कृति को भी सकारात्मक दिशा देता है।

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सोशल मीडिया पर दीपिंदर गोयल की इस पहल को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है। कई लोग इसे कर्मचारियों के प्रति सम्मान और पारदर्शिता की मिसाल बता रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ इसे कंपनी के विस्तार और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को वापस जोड़ने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वर्तमान समय में कंपनियों के लिए अनुभवी और प्रशिक्षित कर्मचारियों को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे में पूर्व कर्मचारियों को वापस लाने की पहल संगठन के लिए लाभदायक साबित हो सकती है क्योंकि वे पहले से कंपनी की कार्यप्रणाली और संस्कृति को समझते हैं।

दीपिंदर गोयल की इस पहल ने कॉर्पोरेट जगत में कर्मचारियों और नेतृत्व के रिश्तों को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है। कई लोग इसे एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देख रहे हैं जहां कंपनी अपने पुराने कर्मचारियों को महत्व दे रही है और उन्हें दोबारा अवसर देने के लिए तैयार है।

कुल मिलाकर दीपिंदर गोयल की यह पहल जोमैटो और उसकी पैरेंट कंपनी इटरनल के लिए एक भावनात्मक और रणनीतिक कदम के रूप में देखी जा रही है, जिसने न केवल हजारों लोगों को कंपनी से दोबारा जुड़ने के लिए प्रेरित किया है बल्कि कॉर्पोरेट संस्कृति में पारदर्शिता और संबंधों की अहमियत को भी उजागर किया है।

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