जन्मदिन मनाने की सरल वैदिक विधि

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1. सही जन्मदिन कैसे तय करें

  • जन्मदिन अंग्रेज़ी तारीख़ से नहीं, बल्कि पंचांग के अनुसार मनाना चाहिए.

  • जिस दिन आपका जन्म-नक्षत्र पड़े, वही आपका वैदिक जन्मदिन होता है.

  • सूर्योदय के बाद कम से कम 3 घंटे वाला दिन चुनें.

  • यदि जन्ममास अधिकमास हो, तो शुद्ध मास में ही जन्मदिन मनाएँ.

2. पूजा कौन कर सकता है

  • चाहें तो किसी पंडित जी को बुलाएँ.

  • या फिर स्वयं भी श्रद्धा से यह पूजा कर सकते हैं.

3. पूजा की तैयारी

  • स्नान कर साफ कपड़े पहनें.

  • पूजा स्थल को साफ करें.

  • पूर्व दिशा की ओर मुख करके शांत मन से बैठें.

  • हाथ में थोड़े चावल (अक्षत) रखें.

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4. संकल्प करें (साधारण शब्दों में)
मन में यह भावना रखें—
“मैं अपनी आयु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की वृद्धि के लिए यह जन्मदिन पूजा कर रहा/रही हूँ.”

5. मुख्य पूजा

  • पहले गणेश जी, फिर नवग्रहकुलदेवी-कुलदेवता और जन्म-नक्षत्र के स्वामी का स्मरण करें.

  • दीपक जलाएँ, अगरबत्ती करें.

  • फूल, फल या मिठाई अर्पित करें.

6. दीर्घायु के लिए विशेष स्मरण
भगवान मार्कण्डेय ऋषि को याद करें और प्रार्थना करें कि जैसे उन्हें दीर्घायु मिली, वैसे ही हमें भी स्वास्थ्य और लंबी उम्र मिले.

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7. षष्ठी देवी और चिरंजीवियों का स्मरण

  • संतान, परिवार और जीवन की रक्षा के लिए षष्ठी देवी को नमन करें.

  • अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम जैसे चिरंजीवियों को स्मरण करें.

8. भोग और सरल उपाय

  • दूध में थोड़ा सा गुड़ और काले तिल मिलाकर भगवान को अर्पित करें.

  • फिर वही प्रसाद स्वरूप स्वयं ग्रहण करें.

9. हवन (यदि संभव हो)

  • यदि हवन कर सकें तो करें, अन्यथा केवल दीप-पूजन भी पर्याप्त है.

10. रक्षा-सूत्र

  • अपने हाथ में कलावा या रक्षा-सूत्र बाँधें और ईश्वर से रक्षा की प्रार्थना करें.

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11. पूजा समाप्ति

  • भगवान से भूल-चूक के लिए क्षमा माँगें.

  • प्रसाद बाँटें और बड़ों का आशीर्वाद लें.

  • ब्राह्मण, कन्या या ज़रूरतमंद को भोजन कराएँ.

12. इस दिन क्या न करें

  • बाल या नाखून न काटें.

  • झगड़ा, नशा, हिंसा और गलत भोजन से बचें.

  • बहुत गर्म पानी से स्नान न करें.

  • अनावश्यक यात्रा से बचें.

वैदिक जन्मदिन का उद्देश्य केक काटना नहीं, बल्कि आयु, स्वास्थ्य और शांति के लिए ईश्वर का धन्यवाद करना है.अगर विधि सरल हो और भावना सच्ची हो, तो वही पूजा सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है.

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