सियोल. उत्तर कोरिया से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. दुनिया को अपनी परमाणु ताकत से डराने वाले तानाशाह किम जोंग उन ने आखिरकार अपने उत्तराधिकारी का फैसला कर लिया है. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने बड़ा दावा किया है कि किम जोंग ने अपनी नाबालिग बेटी किम जू ऐ को अपना सियासी वारिस घोषित कर दिया है. इसका सीधा मतलब है कि भविष्य में उत्तर कोरिया की सत्ता की बागडोर उनकी बेटी के हाथों में होगी. गौरतलब है कि किम जोंग उन ने भी अपने पिता किम जोंग-इल के निधन के बाद इसी तरह सत्ता संभाली थी.
बढ़ती सक्रियता और विदेशी दौरों से मिले संकेत
किम जोंग की बेटी किम जू ऐ के बारे में वैसे तो सार्वजनिक तौर पर बहुत कम जानकारी उपलब्ध है, लेकिन हाल के दिनों में उनकी भूमिका में बदलाव देखा गया है. दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसी ने अपने देश के सांसदों को बताया है कि उन्होंने कई परिस्थितियों और सबूतों का आकलन करने के बाद यह दावा किया है. इनमें सबसे अहम बात आधिकारिक और बड़े कार्यक्रमों में किम जू ऐ की बढ़ती सार्वजनिक उपस्थिति है. हाल ही में उन्हें अपने पिता के साथ बीजिंग यात्रा पर भी देखा गया था, जो उनकी पहली ज्ञात विदेश यात्रा थी. इन सभी गतिविधियों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि उन्हें भविष्य के नेता के रूप में तैयार किया जा रहा है.
फरवरी में होने वाले पार्टी सम्मेलन पर टिकीं नजरें
इस दावे की पुष्टि के लिए अब पूरी दुनिया और खुफिया एजेंसियों की नजरें फरवरी के अंत में होने वाले उत्तर कोरिया के पार्टी सम्मेलन पर टिकी हैं. एनआईएस ने जानकारी दी है कि वह इस बात पर बारीकी से नजर रखेगी कि क्या किम जू ऐ इस सम्मेलन में भाग लेती हैं या नहीं. यह सम्मेलन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा राजनीतिक आयोजन माना जाता है, जो हर पांच साल में एक बार होता है. उम्मीद है कि इस मंच से अगले पांच वर्षों के लिए देश की विदेश नीति, युद्ध योजना और परमाणु महत्वाकांक्षाओं जैसी प्राथमिकताओं का खाका खींचा जाएगा. ऐसे महत्वपूर्ण मंच पर बेटी की मौजूदगी उत्तराधिकार की खबरों पर मुहर लगा सकती है.
गुमनाम बेटे को छोड़कर बेटी पर जताया भरोसा
किम जू ऐ, किम जोंग उन और उनकी पत्नी री सोल जू की इकलौती ऐसी संतान हैं, जिन्हें दुनिया जानती है. माना जाता है कि उनकी उम्र करीब 13 साल है. उन्होंने साल 2022 में पहली बार सरकारी टेलीविजन पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, जब वह अपने पिता के साथ बैलिस्टिक मिसाइल का निरीक्षण करती नजर आई थीं. दिलचस्प बात यह है कि एनआईएस का मानना है कि किम जोंग उन का एक बड़ा बेटा भी है, लेकिन उसे न तो कभी सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया है और न ही कभी उत्तर कोरियाई मीडिया में दिखाया गया है. ऐसे में बेटे के होते हुए बेटी को आगे लाना उत्तर कोरियाई राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है.




























