नई दिल्ली. नई वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग में भारत के लिए बड़ी राहत और गौरव की खबर सामने आई है. वर्ष 2026 में जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पासपोर्ट ने 10 स्थान की छलांग लगाते हुए वैश्विक रैंकिंग में 75वां स्थान हासिल कर लिया है. यह रैंकिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पासपोर्ट की ताकत को दर्शाने वाली प्रतिष्ठित सूची हेनले पासपोर्ट इंडेक्स के आधार पर जारी की गई है. इस नई रैंकिंग के अनुसार अब भारतीय नागरिक दुनिया के 56 देशों में बिना पहले से वीजा लिए यात्रा कर सकते हैं, जिससे विदेश यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान हो गई है.
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पासपोर्ट की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में लगातार सुधरी है. वर्ष 2025 में भारत 85वें स्थान पर था, जबकि 2024 में भारत की रैंकिंग 80वीं थी. वर्ष 2023 में भारत 84वें स्थान पर और वर्ष 2021 में यह रैंकिंग 90वें स्थान तक गिर गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता, आर्थिक मजबूती और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सुधार के कारण पासपोर्ट की रैंकिंग में यह सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है.
इस वर्ष की सूची में एशियाई देशों का दबदबा देखने को मिला है. सूची में सिंगापुर लगातार पहले स्थान पर बना हुआ है, जहां के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं. दूसरे स्थान पर जापान और तीसरे स्थान पर दक्षिण कोरिया शामिल हैं. वहीं सूची में सबसे नीचे अफगानिस्तान का स्थान रहा, जहां के नागरिकों को केवल 24 देशों में वीजा मुक्त यात्रा की सुविधा प्राप्त है.
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया के 199 पासपोर्ट को 227 वैश्विक गंतव्यों तक पहुंच के आधार पर रैंक करता है. इस इंडेक्स में किसी पासपोर्ट को एक अंक तब दिया जाता है जब उस देश का नागरिक बिना वीजा, वीजा ऑन अराइवल, विजिटर परमिट या इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन के माध्यम से किसी देश में प्रवेश कर सकता है. यदि किसी देश में यात्रा के लिए पहले से वीजा आवेदन आवश्यक होता है तो उस स्थिति में पासपोर्ट को शून्य अंक दिया जाता है.
भारतीय नागरिकों के लिए वीजा मुक्त यात्रा की सुविधा बढ़ने से पर्यटन, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है. ट्रैवल विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारतीय यात्रियों को यात्रा की योजना बनाना आसान होगा और कई देशों के पर्यटन उद्योग को भी फायदा मिलेगा. खास तौर पर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और कैरेबियन देशों में भारतीय पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है.
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय नागरिक अब जिन 56 देशों में वीजा फ्री या आसान प्रवेश सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं, उनमें शामिल देश इस प्रकार हैं –
अंगोला
बारबाडोस
भूटान
ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स
बुरुंडी
कंबोडिया
केप वर्डे आइलैंड्स
कोमोरो आइलैंड्स
कुक आइलैंड्स
जिबूती
डोमिनिका
इथियोपिया
फिजी
ग्रेनेडा
गिनी-बिसाऊ
हैती
इंडोनेशिया
जमैका
जॉर्डन
कजाखस्तान
केन्या
किरिबाती
लाओस
मकाऊ
मेडागास्कर
मलेशिया
मालदीव
मार्शल आइलैंड्स
मॉरीशस
माइक्रोनेशिया
मंगोलिया
मोंटसेराट
मोजाम्बिक
म्यांमार
नेपाल
नियू
पलाऊ आइलैंड्स
फिलीपींस
कतर
रवांडा
समोआ
सेनेगल
सेशेल्स
सिएरा लियोन
श्रीलंका
सेंट किट्स एंड नेविस
सेंट लूसिया
सेंट विंसेंट एंड ग्रेनेडाइंस
तंजानिया
थाईलैंड
गाम्बिया
तिमोर लेस्ते
त्रिनिदाद एंड टोबैगो
तुवालु
वानुअतु
जिम्बाब्वे
विशेषज्ञों का मानना है कि पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार किसी देश की अंतरराष्ट्रीय छवि, कूटनीतिक संबंध और आर्थिक स्थिरता का संकेत होता है. भारत की रैंकिंग में सुधार से यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की स्थिति मजबूत हो रही है. ट्रैवल उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि आने वाले समय में यदि भारत और अधिक देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते करता है तो भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग और बेहतर हो सकती है.
फिलहाल भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में आई इस छलांग को देश के लिए सकारात्मक उपलब्धि माना जा रहा है. इससे न केवल विदेश यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों को सुविधा मिलेगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.






























