बांग्लादेश चुनाव में ऐतिहासिक उलटफेर, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की शानदार वापसी, तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने की ओर

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ढाका. 2026 के आम चुनाव परिणामों ने दक्षिण एशियाई राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। लगभग दो दशकों बाद सत्ता से बाहर रही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित परिणामों के अनुसार पार्टी और उसके सहयोगियों ने 300 सदस्यीय संसद में 209 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। इस जीत के साथ ही पार्टी प्रमुख तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बनने की ओर बढ़ रहे हैं, जो 1991 के बाद देश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री होंगे।

चुनाव 12 फरवरी को संपन्न हुआ था, जिसकी मतगणना 13 फरवरी तक जारी रही। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कुल मतदान प्रतिशत लगभग 59.44 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसे चुनाव आयोग ने ऐतिहासिक बताया है। इस चुनाव की खास बात यह रही कि यह मतदान 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद पहली बार आयोजित हुआ, जिसने तत्कालीन सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था और उसके बाद अंतरिम प्रशासन लागू किया गया था।

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मतगणना के शुरुआती रुझानों से ही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की बढ़त स्पष्ट हो गई थी। धीरे-धीरे पार्टी ने बहुमत के आंकड़े को पार करते हुए निर्णायक जीत दर्ज की। दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी दल केवल 76 सीटों पर सिमट गए, जबकि छात्र आंदोलन से उभरी नई राजनीतिक पार्टी ने केवल छह सीटें जीतकर सीमित प्रभाव ही दिखाया।

इस चुनाव का राजनीतिक प्रभाव केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं है बल्कि संवैधानिक सुधारों के लिए भी निर्णायक माना जा रहा है। आम चुनाव के साथ ही राष्ट्रीय जनमत संग्रह भी कराया गया था, जिसमें जुलाई नेशनल चार्टर नामक 84 सूत्रीय सुधार पैकेज पर जनता की राय ली गई। चुनाव आयोग के अनुसार लगभग 4.8 करोड़ मतदाताओं ने इस सुधार प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया, जबकि लगभग 2.25 करोड़ मतदाताओं ने इसका विरोध किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार पैकेज के लागू होने से प्रशासनिक व्यवस्था, लोकतांत्रिक संस्थाओं और शासन प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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राजनीतिक घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा तारिक रहमान की वापसी को लेकर हो रही है। करीब 17 वर्षों तक लंदन में निर्वासन के बाद वह दिसंबर 2025 में स्वदेश लौटे थे। उनकी वापसी के कुछ दिनों बाद उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया था। अब चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

इस चुनाव परिणाम का सबसे बड़ा झटका पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के लिए माना जा रहा है, जो 2024 के राजनीतिक संकट के बाद भारत में निर्वासन में रह रही हैं। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद उनकी प्रत्यर्पण की मांग तेज हो गई है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे कानूनी प्रक्रिया के तहत शेख हसीना को वापस लाने की कोशिश जारी रखेंगे।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस चुनाव परिणाम को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को फोन कर जीत की बधाई दी और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की इच्छा जताई। इसके अलावा पाकिस्तान, मलेशिया, श्रीलंका और मालदीव समेत कई देशों के नेताओं ने भी नई सरकार को शुभकामनाएं दी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद क्षेत्रीय कूटनीति और व्यापारिक संबंधों में नए समीकरण बन सकते हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि नई सरकार के सामने आर्थिक सुधार, राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आंतरिक प्रशासनिक सुधारों को संतुलित करना भी नई सरकार के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है। फिलहाल पूरे देश में चुनाव परिणाम को लोकतंत्र की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है और आने वाले दिनों में सरकार गठन तथा शपथ ग्रहण समारोह पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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