देशभर में कीमती धातुओं के बाजार में शुक्रवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और कारोबारियों के बीच चिंता का माहौल बन गया। सर्राफा बाजार से मिली जानकारी के अनुसार सोने और चांदी दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी देखने को मिली है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू मांग में कमजोरी और वैश्विक आर्थिक संकेतों के कारण पूरे देश में बुलियन बाजार दबाव में रहा।
आंकड़ों के अनुसार ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन ने बताया कि चांदी की कीमतों में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। चांदी 13,500 रुपये गिरकर 2.55 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। वहीं सोने की कीमत में भी कमी दर्ज की गई और 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 2,400 रुपये सस्ता होकर 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। यह गिरावट देश के अधिकांश प्रमुख सर्राफा बाजारों में देखने को मिली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में शादी-विवाह और त्योहारी खरीदारी सीमित रहने के कारण बाजार में मांग कमजोर बनी हुई है। इसी वजह से सोने और चांदी के कारोबार में अपेक्षित तेजी नहीं आई। कारोबारियों के अनुसार खुदरा खरीदारों की संख्या में भी कमी देखी जा रही है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
कमोडिटी बाजार के विश्लेषकों ने इस गिरावट के पीछे वैश्विक परिस्थितियों को भी जिम्मेदार बताया है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों को लेकर सतर्क बने हुए हैं। खासतौर पर अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी महंगाई से जुड़े आंकड़ों का बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। निवेशकों का मानना है कि महंगाई के आंकड़ों के आधार पर ब्याज दरों से जुड़े फैसले लिए जा सकते हैं, जिससे बुलियन बाजार की दिशा तय होगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर भी भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। वैश्विक स्तर पर सोना और चांदी दोनों में हलचल बनी हुई है। हालांकि विदेशी बाजार में कीमतों में कुछ सुधार देखा गया है, लेकिन निवेशकों की सतर्कता के कारण घरेलू बाजार पर दबाव बना हुआ है।
इस बीच कमोडिटी रिसर्च विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी महंगाई दर में कमी आती है तो केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में नरमी की संभावना बढ़ सकती है, जिससे सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। वहीं यदि महंगाई दर ऊंची बनी रहती है और रोजगार बाजार मजबूत रहता है तो ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाएगी, जिससे कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है। इस संबंध में कोटक सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों ने भी बाजार में अनिश्चितता को प्रमुख कारण बताया है।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से भी सोने और चांदी की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस-यूक्रेन तनाव में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों को जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित किया है। इसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ा है।
इसके अलावा चीन की औद्योगिक मांग में संभावित कमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सुस्ती के संकेत भी चांदी की कीमतों में गिरावट का कारण बने हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई से जुड़े आंकड़ों के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
सर्राफा कारोबारियों के अनुसार यदि घरेलू बाजार में मांग में तेजी आती है तो कीमतों में स्थिरता देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। आर्थिक जानकारों का कहना है कि महंगाई दर, ब्याज दरों की दिशा और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हालात आने वाले समय में बुलियन बाजार की चाल तय करेंगे।






























