नई दिल्ली. दिसंबर में थोक महंगाई (डबलूपीआई) बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंच गई है. ये 8 महीनों का हाई लेवल है. खाने-पीने की चीजें महंगी होने से महंगाई बढ़ी है. इससे पहले नवंबर में ये माइनस 0.32 प्रतिशत पर थी. वहीं अक्टूबर में ये माइनस 1.21त्न पर आ गई थी. कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 दिसंबर को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं.
खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं
रोजाना की जरूरत वाले सामानों (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई माइनस 2.93 प्रतिशत से बढ़कर 0.21प्रतिशत हो गई. खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई माइनस 2.60 प्रतिशत से बढ़कर 0 प्रतिशत हो गई. फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर माइनस 2.27 प्रतिशत से घटकर माइनस 2.31 प्रतिशत रही. मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर 1.33 प्रतिशत से बढ़कर 1.82 प्रतिशत रही.
नवंबर में रिटेल महंगाई बढ़कर 1.33 प्रतिशत हुई
दिसंबर में रिटेल महंगाई पिछले महीने के मुकाबले बढ़कर 1.33 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है. ये तीन महीनों का हाई लेवल है. इससे पहले नवंबर में ये 0.71 प्रतिशत पर थी. वहीं अक्टूबर में ये 0.25 प्रतिशत पर थी, जो 14 साल में सबसे कम स्तर था.
होलसेल प्राइस इंडेक्स का आम आदमी पर असर
थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है. अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं. सरकार केवल टैक्स के जरिए डबलूपीआई को कंट्रोल कर सकती है. जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी. हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है. डबलूपीआई में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है.


































