15 जनवरी को तिल द्वादशी का पुण्य स्नान दान, तर्पण से जुड़ा विशेष संयोग

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15 जनवरी गुरुवार को माघ मास की कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को तिल द्वादशी का पर्व श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाएगा. मकर संक्रांति के बाद आने वाली यह तिथि सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखती है. मान्यता है कि इस दिन तिल का दान, तिल से स्नान और तिल मिश्रित जल से पितरों का तर्पण करने से पापों का क्षय होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. उत्तरायण काल में पड़ने वाली तिल द्वादशी को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना गया है, यही कारण है कि देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालु नदी, तालाब और तीर्थ स्थलों पर स्नान कर दान-पुण्य करते हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिल को भगवान विष्णु और यमराज से जुड़ा माना गया है. कहा जाता है कि माघ कृष्ण द्वादशी के दिन तिल का प्रयोग करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और जीवन में स्थिरता आती है. शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन तिल के छह प्रयोग—तिल से स्नान, तिल का उबटन, तिल का होम, तिल का दान, तिल का सेवन और तिल से तर्पण—करने से मनुष्य को विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है. यही वजह है कि तिल द्वादशी को ‘तिलों की द्वादशी’ भी कहा जाता है.

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पितृ तर्पण की दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. ऐसी मान्यता है कि तिल और जल से किए गए तर्पण से पितृलोक में संतोष प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कई लोग इस दिन ब्राह्मण भोज, गरीबों को अन्न-वस्त्र दान और तिल-गुड़ से बने प्रसाद का वितरण करते हैं. खासकर उत्तर भारत में इस तिथि को पितरों के निमित्त दान करना शुभ माना जाता है.

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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार उत्तरायण में सूर्य के मकर राशि में होने और माघ मास की कृष्ण द्वादशी के संयोग से तिल द्वादशी का महत्व और बढ़ जाता है. यह दिन न केवल धार्मिक अनुष्ठानों बल्कि आत्मशुद्धि और संयम का भी प्रतीक माना जाता है. आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच भी बड़ी संख्या में लोग इस परंपरा को निभाते हुए आस्था के साथ तिल द्वादशी का व्रत और कर्मकांड करते हैं.

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कुल मिलाकर 15 जनवरी गुरुवार को पड़ रही तिल द्वादशी श्रद्धा, दान और पितृ स्मरण का अवसर लेकर आ रही है. धार्मिक विश्वास रखने वालों के लिए यह दिन पुण्य अर्जन, पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने का विशेष अवसर माना जा रहा है.

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