महादेव भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए बस एक लोटा जल और बेलपत्र ही काफी

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महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए शास्त्रों में बेहद सरल और प्रभावशाली विधि बताई गई है जिसका पालन कर भक्त भगवान आशुतोष का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और इस विशेष दिन की महत्ता को देखते हुए विद्वानों का मानना है कि शिव जी भाव के भूखे हैं इसलिए यदि आपके पास अधिक सामग्री नहीं है तो भी मात्र सच्चे मन से किया गया जल अभिषेक आपको पूर्ण फल प्रदान कर सकता है।

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का उत्सव है। यदि आप घर पर ही सरल तरीके से पूजन करना चाहते हैं, तो यह विधि आपके लिए बहुत उपयोगी रहेगी।

पूजन सामग्री

पूजा शुरू करने से पहले ये चीजें एकत्रित कर लें:

  • अभिषेक के लिए: शुद्ध जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल।

  • अर्पण के लिए: बेलपत्र (कम से कम 3), धतूरा, भांग, अक्षत (बिना टूटे चावल), सफेद चंदन।

  • आरती के लिए: दीपक, धूप/अगरबत्ती, कपूर।

  • प्रसाद: फल, मिठाई या पंचामृत।

सरल पूजन विधि

1. स्नान और संकल्प

सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो सफेद) धारण करें। हाथ में जल लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें कि "हे शिव शंभू, मैं आज आपकी भक्ति और प्रसन्नता के लिए यह पूजन कर रहा/रही हूँ।"

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2. शिव अभिषेक

शिवलिंग पर जल और पंचामृत अर्पित करें। अभिषेक करते समय "ॐ नमः शिवाय" का जाप निरंतर करते रहें।

  • सबसे पहले जल चढ़ाएं।

  • फिर दूध, दही, घी, शहद और अंत में फिर से गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं।

3. श्रृंगार और अर्पण

अभिषेक के बाद शिवलिंग को साफ कपड़े से धीरे से पोंछें और निम्नलिखित चीजें अर्पित करें:

  • चंदन: शिवलिंग पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं।

  • अक्षत: चंदन के ऊपर बिना टूटे हुए चावल चढ़ाएं।

  • बेलपत्र: बेलपत्र के चिकने हिस्से पर चंदन लगाकर उसे शिवलिंग पर उल्टा (चंदन वाला हिस्सा नीचे) अर्पित करें।

  • धतूरा और फूल: शिव जी को प्रिय धतूरा, आक के फूल या कोई भी सफेद फूल चढ़ाएं।

4. धूप-दीप और नैवेद्य

धूप और दीपक जलाएं। भगवान को फल या घर में बनी मिठाई का भोग लगाएं। याद रखें, शिव जी को अर्पित किया गया भोग बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए।

5. मंत्र जाप और आरती

शांत मन से बैठकर "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें। अंत में शिव जी की आरती करें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।

रविवार को सुबह नहा धोकर भगवान शिव का पूजन करें, पंचोपचार पूजन करें, फिर शिवरात्रि का व्रत करने का संकल्प लें। संकल्प में स्पष्ट कहें कि व्रत जलाहार, फलाहार या निराहार जैसे रहना हो कहैं।

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दिन भर, नमः शिवाय या ॐ नमः शिवाय। मानसिक जप करते रहें, शाम होने पर फिर से शिवजी का पंचोपचार पूजन करें, फिर रात मे प्रथम प्रहर होने पर शिवजी का पूजन चन्दन चावल काले तिल कमल और कनेर के फूल से करें।

ॐ भवाय नमः

ॐ शर्वाय नमः

ॐ रूद्राय नमः

ॐ पशुपताय नमः

ॐ उग्राय नमः

ॐ महानाय नमः

ॐ भीमाय नमः

ॐ ईषानाय नमः

इन आठ नामो का जाप करें। नैवेध मे पकवान अर्पित करें। नारियल और पान के साथ अर्घ्य दें।

ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें।

दूसरे प्रहर लगने पर शिवजी का तिल जौ कमल पुष्प विल्वपत्र द्वारा पूजन करें। खीर का नैवेद्य प्रदान करें। बिजौरा नीबू के साथ अर्घ्य दें, ॐ नमः शिवाय का प्रथम प्रहर की अपेक्षा दुगना मंत्र जाप करें।

तीसरे प्रहर होने पर फिर से शिवजी का गेहूं, आक के फूल, कमल पुष्प, विल्वपत्र, तिल द्वारा पूजन करें। पुऐ का नैवेध एवं शाक अर्पित करें। कपूर से आरती करें अनार के फल के साथ अर्घ्य दें। ॐ नमः शिवाय का दूसरे प्रहर की अपेक्षा दुगने मंत्र का जाप करें।

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चतुर्थ प्रहर होने पर शिवजी का उडद, कागनी मूगं, सप्तधान, शंखपुष्पी, विल्वपत्र से पूजा करें। उडद के बडै, मिठाई का नैवेध प्रदान करें। केले के साथ अर्घ्य दें। तीसरे प्रहर की अपेक्षा ॐ नमः शिवाय का आठ गुना मंत्र का जाप करें फिर सुबह होने तक जाप भजन करते रहें। सुबह फिर भगवान शिव का पूजन करें और पूजन का विसर्जन करें तथा क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।

शिवलिंग पर पूजा करने वाले साधक प्रत्येक पूजा मे शिवलिंग को दूध दही घी शहद शक्कर गंगाजल गन्ना का रस शुद्ध पानी आदि से स्नान कराये या जो सुलभ हो जाये उससे करा लें।

पूजन मे कोई सामग्री ना मिले तो जो मिल जाये उसी से पूजन करें। शिव जी केवल एक लोटा शुद्ध जल और 'भाव' से भी प्रसन्न हो जाते हैं।

प्रथम प्रहर मे जाप उतना ही करें जितने का चौथे प्रहर मे आठ गुना जाप कर सकें।

किसी कामना के लिये पूजन करना चाहते हैं तो संकल्प में स्पष्ट बोल दें शिव जी की कृपा से वो कामना अवश्य ही शीघ्र पूरी हो जायेगी। प्रत्येक प्रहर मे धूप दीप अवश्य दें। शिवरात्रि का पूजन आप परिवार सहित करें, मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

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