बांग्लादेश में तारिक रहमान की जीत के बाद भारत संग रिश्तों पर बांग्लादेश फर्स्ट रुख शेख हसीना प्रत्यर्पण पर सख्त संकेत

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नई दिल्ली.बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज करते हुए बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की चुनावी जीत ने दो दशकों बाद सत्ता में वापसी का रास्ता खोल दिया है। 12 फरवरी को संपन्न हुए आम चुनावों के नतीजों ने 2024 में छात्र आंदोलनों के बाद शेख हसीना सरकार के पतन से पैदा हुए उन्नीस महीनों के राजनीतिक शून्य को समाप्त कर दिया। अब तारिक रहमान के अगले सप्ताह शपथ लेने की संभावना के बीच ढाका की नई सरकार के भारत के साथ संबंधों और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर रुख पर सबकी नजरें टिक गई हैं।

बीएनपी को आम चुनावों में दो-तिहाई बहुमत मिला है। पार्टी ने 299 में से 209 सीटें जीत लीं, जबकि सहयोगियों को तीन सीटें हासिल हुईं। चुनाव आयोग के अनुसार 59 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। हालांकि शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया था। हसीना ने चुनावों को “सुनियोजित ढोंग” करार देते हुए कम मतदान को जन असंतोष का संकेत बताया।

चुनाव जीतने के एक दिन बाद अपने पहले संबोधन में तारिक रहमान ने राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत बांग्लादेश के लोगों और लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वालों की है। रहमान ने कहा कि देश अब एक नए सफर की शुरुआत कर रहा है, हालांकि उन्हें एक “कमजोर अर्थव्यवस्था” विरासत में मिली है, जिसे उन्होंने पूर्व सत्तावादी शासन की देन बताया।

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अपने संबोधन के दौरान तारिक रहमान ने विदेश नीति को लेकर स्पष्ट संकेत दिए। भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने “बांग्लादेश फर्स्ट” एजेंडा दोहराया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की विदेश नीति बांग्लादेश और उसके लोगों के हितों से तय होगी। रहमान ने पहले भी कहा था कि बीएनपी सरकार भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखेगी और किसी भी देश को अपना “मालिक” नहीं मानेगी।

नई दिल्ली में भी इन घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखी जा रही है। चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को फोन कर जीत की बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उनके संदेश में पड़ोसी संबंधों को मजबूत करने और पारस्परिक हितों को आगे बढ़ाने की बात कही गई।

बीएनपी ने भी प्रधानमंत्री मोदी के संदेश का स्वागत किया और कहा कि वह भारत के साथ बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए रचनात्मक संवाद चाहता है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और क्षेत्रीय स्थिरता की साझा प्रतिबद्धता के आधार पर संबंधों को मजबूत किया जाएगा। बीएनपी के एक वरिष्ठ नेता ने संकेत दिया कि शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किए जाने की संभावना है।

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हालांकि भारत के साथ रिश्तों को लेकर संतुलित संकेतों के बीच शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा दोनों देशों के बीच संभावित तनाव का कारण बन सकता है। हसीना अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं, जब छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलनों के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। नवंबर 2025 में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में उन्हें अनुपस्थिति में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।

ढाका पहले ही नई दिल्ली से द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत हसीना को वापस सौंपने की मांग कर चुका है। बीएनपी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने चुनाव जीत के दिन दोहराया कि पार्टी कानूनी प्रक्रिया के तहत हसीना के प्रत्यर्पण की मांग जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच का मामला है और भारत से अनुरोध किया गया है कि हसीना को बांग्लादेश भेजा जाए ताकि वे मुकदमे का सामना कर सकें।

स्वयं तारिक रहमान ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रत्यर्पण का प्रश्न “कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है।” उनके इस बयान को संतुलित रुख के रूप में देखा जा रहा है, जहां एक ओर पार्टी अपने समर्थकों के बीच न्याय की मांग को दोहरा रही है, वहीं दूसरी ओर भारत के साथ सीधे टकराव से बचने की कोशिश भी कर रही है।

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विश्लेषकों का मानना है कि तारिक रहमान की सरकार को घरेलू राजनीतिक अपेक्षाओं और क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन के बीच सावधानीपूर्वक कदम बढ़ाने होंगे। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और सुरक्षा हितों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में ढाका के लिए “बांग्लादेश फर्स्ट” नीति को लागू करते हुए व्यावहारिक कूटनीति अपनाना चुनौतीपूर्ण होगा।

बीएनपी की वापसी को बांग्लादेश की राजनीति में नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। छात्र आंदोलनों से उपजे असंतोष ने सत्ता परिवर्तन की राह बनाई और अब जनता की अपेक्षाएं नई सरकार से काफी ऊंची हैं। तारिक रहमान ने अपने संबोधन में लोकतंत्र की बहाली और नागरिक अधिकारों की पुनर्स्थापना का वादा किया है।

अब ध्यान इस बात पर है कि शपथ ग्रहण के बाद नई सरकार भारत के साथ अपने संबंधों को किस दिशा में ले जाती है और शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर क्या औपचारिक कदम उठाती है। क्षेत्रीय राजनीति और द्विपक्षीय समीकरणों के लिहाज से आने वाले सप्ताह दक्षिण एशिया की कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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