ईरान विरोध प्रदर्शन और अमेरिकी प्रतिक्रिया के बीच कतर में अमेरिकी एयरबेस खाली करने के आदेश

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तेहरान/डोहा: ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन और उसके बाद अमेरिकी चेतावनियों के बीच, कतर में स्थित अल उदीद अमेरिकी एयरबेस से कुछ कर्मियों को सुरक्षित निकालने का आदेश दिया गया है। इस निर्णय को कतर की अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ऑफिस ने "क्षेत्रीय तनाव" के चलते लिया गया बताया। वहीं, ईरानी न्यायपालिका के प्रमुख ने आरोपियों के खिलाफ तेज़ी से ट्रायल करने की घोषणा की है, जबकि अमेरिका ने ईरान की क्रूर सरकारी कार्रवाई के मद्देनजर 'मजबूत प्रतिक्रिया' की चेतावनी दी है।

जानकारी के अनुसार, अमेरिकी एयरबेस में कुछ कर्मियों को निकाला जा रहा है ताकि किसी भी अप्रत्याशित सैन्य या सुरक्षा खतरे के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कतर सरकार ने बयान में कहा कि देश की सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यह कार्रवाई ईरानी विरोध प्रदर्शनों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में की गई है।

ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की मौतों की संख्या बढ़कर कम से कम 2,571 हो गई है। विरोध प्रदर्शनकारी समूह के अनुसार, इनमें से 2,403 प्रदर्शनकारी और 147 सरकारी समर्थन वाले लोग हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान 12 बच्चे और 9 ऐसे नागरिक भी मारे गए जो किसी भी प्रदर्शनों में भाग नहीं ले रहे थे। इस दौरान लगभग 18,100 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ईरानी न्यायपालिका के प्रमुख घोलामहुसैन मोहसनी एजई ने राज्य टेलीविजन पर कहा, "यदि किसी ने किसी को जलाया, सिर कलम किया या आग में डाल दिया, तो हमें अपने कार्य तेज़ी से करने चाहिए।" उनका यह बयान जेल का दौरा करने के बाद प्रसारित किया गया, जहां विरोध प्रदर्शनकारियों को रखा गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार इन घटनाओं को "दंगों" के रूप में देख रही है।

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ईरान की सरकार ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह सैन्य हस्तक्षेप का बहाना बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में हुई हिंसा और विरोध प्रदर्शन पर 'मजबूत कार्रवाई' की चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कहा कि अगर किसी नई हमले की स्थिति बनी तो वह अमेरिकी सैन्य और समुद्री संपत्तियों पर हमला करेगा।

सऊदी अरब ने ईरान को स्पष्ट कर दिया है कि उसका क्षेत्र और वायुसेना किसी भी हमले के लिए उपयोग नहीं होगा। दो सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब ने ईरान को सीधे यह संदेश दिया कि वह किसी भी सैन्य कार्रवाई में भाग नहीं लेगा और उसका हवाई क्षेत्र और भूमि ईरान पर हमले के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यह संदेश उस समय आया जब अमेरिका ने ईरान पर सैन्य प्रतिक्रिया की चेतावनी दी थी।

कतर के अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ऑफिस ने बयान में कहा कि अल उदीद बेस में कर्मियों को निकालने का निर्णय "वर्तमान क्षेत्रीय तनाव" के जवाब में लिया गया। बयान में यह भी कहा गया कि कतर ने सुरक्षा और सुरक्षा उपायों को लागू करना जारी रखा है, जिसमें सैन्य सुविधाओं और महत्वपूर्ण संरचनाओं की रक्षा शामिल है।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत की। ट्विटर पर उन्होंने बताया कि दोनों मंत्रियों ने ईरान और उसके आस-पास की बदलती स्थिति पर चर्चा की। यह कदम भारत की सक्रिय कूटनीतिक कोशिशों का हिस्सा है, ताकि क्षेत्र में तनाव बढ़ने की स्थिति में भारतीय हित सुरक्षित रह सकें।

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ईरानी विरोध प्रदर्शन, जो मुद्रा संकट से शुरू हुए थे, अब सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनी के शासन की चुनौती बन गए हैं। इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जो आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक असंतोष के चलते भड़क उठे। अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में 75 देशों से आने वाले विज़िटर्स के लिए वीज़ा प्रक्रिया को स्थगित करने की घोषणा की, जिसमें ईरान और अन्य देशों के नागरिक शामिल हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और सैन्य संतुलन को प्रभावित कर सकता है। अल उदीद एयरबेस, जो मध्य पूर्व का सबसे बड़ा अमेरिकी बेस है, का सुरक्षित संचालन अब और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उनकी सुरक्षा और हितों पर कोई खतरा हुआ तो वह तत्काल प्रतिक्रिया देगा।

अमेरिकी कार्रवाई और ईरानी प्रतिक्रिया के बीच क्षेत्रीय देशों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देश अपने क्षेत्रों का उपयोग किसी भी सैन्य हमले में नहीं होने देने का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं। इसका मतलब यह है कि अगर अमेरिका किसी तरह की सैन्य कार्रवाई करता है, तो उसे खाड़ी देशों के समर्थन की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

ईरानी विरोध प्रदर्शनों का यह दौर कई महीनों से जारी है। हज़ारों लोग सड़क पर हैं और हर दिन मौतों और गिरफ्तारी की संख्या बढ़ रही है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी इस पर चिंता व्यक्त की है और ईरान सरकार से शांतिपूर्ण विरोध को सुरक्षित रूप से प्रकट करने की अपील की है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की चेतावनी के बाद ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिकी सेना कोई हमला करती है, तो ईरानी जवाब भी "सख्त" होगा। इस बीच, अमेरिकी सैन्य उपकरण खाड़ी में तैनात हैं, लेकिन कतर और सऊदी अरब ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके क्षेत्र का कोई भी हिस्सा सैन्य हमले के लिए इस्तेमाल नहीं होगा।

कुल मिलाकर, ईरान में विरोध प्रदर्शन और उसकी वैश्विक प्रतिक्रिया के बीच क्षेत्रीय तनाव बढ़ता जा रहा है। कतर में अमेरिकी एयरबेस से कर्मियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाना और सऊदी अरब का स्पष्ट संदेश, यह संकेत देता है कि खाड़ी क्षेत्र में संभावित सैन्य गतिरोध और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ सकते हैं।

विश्लेषक मानते हैं कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, तो यह न केवल खाड़ी देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। व्यापारिक मार्ग, तेल की आपूर्ति, और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर इसका असर पड़ेगा। इस बीच, भारत जैसी देशों ने कूटनीतिक बातचीत और सतर्क निगरानी बढ़ा दी है ताकि क्षेत्रीय संकट के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।

ईरान में विरोध प्रदर्शन, अमेरिका की चेतावनी, खाड़ी देशों की भूमिका और कतर में अमेरिकी एयरबेस से कर्मियों के निकाले जाने की खबरों ने दुनिया भर में ध्यान आकर्षित किया है। यह स्थिति अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है, क्योंकि हर कदम से भू-राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

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