महाशिवरात्रि: विभूति नाथ मंदिर में पैदल पहुंचे श्रद्धालु:पांडवकालीन मंदिर में कई किलोमीटर पैदल चलकर कर रहे जलाभिषेक, बच्चों में भी उत्साह

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महाशिवरात्रि: विभूति नाथ मंदिर में पैदल पहुंचे श्रद्धालु:पांडवकालीन मंदिर में कई किलोमीटर पैदल चलकर कर रहे जलाभिषेक, बच्चों में भी उत्साह
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महाशिवरात्रि पर श्रावस्ती के सिरसिया क्षेत्र स्थित प्राचीन बाबा विभूति नाथ मंदिर में भोर 4 बजे से ही जलाभिषेक शुरू हो गया। पांडवकालीन मान्यता वाले इस मंदिर में आसपास के कई जिलों और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कई किलोमीटर पैदल चलकर पहुंच रहे हैं। सुबह से ही भक्तों के जत्थे डीजे और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ मंदिर की ओर बढ़ते नजर आए। अनेक श्रद्धालु रात में ही शिवालयों पर पहुंच गए थे और विधि-विधान से जलाभिषेक कर चुके थे। नासिरगंज क्षेत्र के बंबा घाट से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल चलकर पुराना शिवाला महादेव मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया। जगह-जगह सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा यात्रियों का स्वागत किया गया। मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और ‘बोल बम’ व ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से वातावरण शिवमय हो उठा। बच्चों में भी पैदल यात्रा कर जलाभिषेक के लिए पहुंचने का उत्साह देखा गया। लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग, ट्रैफिक प्रबंधन और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है। ड्रोन कैमरों और सादे वस्त्रों में तैनात पुलिस कर्मियों के माध्यम से भी भीड़ पर नजर रखी जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और तांडव नृत्य किया था। यह रात्रि शिवभक्तों के लिए आध्यात्मिक जागृति, अंधकार पर विजय और शिव-शक्ति के मिलन का उत्सव है। मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि महाशिवरात्रि पर सनातन धर्मावलंबी जलाभिषेक कर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं, दिनभर व्रत रखते हैं और शाम को भव्य शोभायात्रा में शामिल होते हैं। वहीं, पंडित सुधाकर शर्मा ने कहा कि यह पर्व मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और ईश्वर प्रेम का संदेश देता है। इस दिन की गई उपासना और साधना भक्तों को ईश्वर के अधिक निकट ले जाती है।
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