भाजपा शासित राज्यों में बंगाली बोलने पर प्रवासी मजदूरों के साथ हो रही क्रूरता, ममता बनर्जी ने साधा केंद्र पर निशाना

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कोलकाता.पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार 16 जनवरी 2026 को एक बेहद गंभीर और राजनीतिक रूप से संवेदनशील आरोप लगाते हुए देश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है. उत्तर बंगाल के अपने प्रशासनिक दौरे पर रवाना होने से पहले कोलकाता में मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों पर प्रहार किया. ममता बनर्जी ने सनसनीखेज दावा किया कि देश के जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं वहां पश्चिम बंगाल से गए प्रवासी मजदूरों को केवल इसलिए प्रताड़ित और प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि वे बंगाली भाषा में बात करते हैं. मुख्यमंत्री ने इसे भाषाई आधार पर भेदभाव और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन करार देते हुए कहा कि यह स्थिति बेहद भयावह है कि किसी भारतीय नागरिक को उसकी मातृभाषा बोलने के कारण निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि वहां के अल्पसंख्यक समुदाय का गुस्सा पूरी तरह से जायज है क्योंकि बाहर गए उनके परिजनों और मजदूरों पर लगातार हमले हो रहे हैं. ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि जब बंगाल के गरीब मजदूर रोटी-बेटी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं तो उन्हें बाहरी बताकर डराया-धमकाया जाता है और उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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पत्रकारिता की शैली में इस बयान के गहरे राजनीतिक निहितार्थ देखे जा रहे हैं क्योंकि बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 की आहट तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ने भाजपा पर एक और तीखा हमला करते हुए कहा कि भगवा दल को यह अहसास हो गया है कि वह 2026 के विधानसभा चुनावों में लोकतांत्रिक तरीके से जीत हासिल नहीं कर पाएगा इसलिए वह अब राज्य में दंगे भड़काने की गहरी साजिश रच रहा है. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में मजदूरों के साथ होने वाली हिंसा दरअसल बंगाल के भीतर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पैदा करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. उन्होंने बेलडांगा की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के लोगों का आक्रोश उनके अपनों पर हुए अत्याचारों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है और प्रशासन को इसे इसी नजरिए से देखना चाहिए. मुख्यमंत्री के इस बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर बंगाली अस्मिता और प्रवासियों की सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अपने राज्य के एक-एक मजदूर की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और वे इस मुद्दे को हर संभव मंच पर उठाएंगी.

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इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ममता बनर्जी का तेवर बेहद आक्रामक रहा और उन्होंने भाजपा की कार्यप्रणाली को विभाजनकारी करार दिया. उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा पूरे देश में एक भाषा और एक संस्कृति की बात करती है तो दूसरी तरफ बंगाली भाषी लोगों को भाषाई आधार पर प्रताड़ित किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक कार्यक्रमों के लिए उत्तर बंगाल रवाना होने से पहले यह संदेश देने की कोशिश की कि वे न केवल बंगाल के भीतर बल्कि बंगाल के बाहर रह रहे अपने राज्य के लोगों के अधिकारों की भी सबसे बड़ी संरक्षक हैं. उन्होंने केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सवाल किया कि आखिर क्यों बंगाल के मजदूरों को असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर किया जा रहा है. ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों और जनता को आगाह किया कि वे भाजपा की साजिशों में न फंसें और राज्य की शांति व्यवस्था को बनाए रखें. उन्होंने दोहराया कि चुनावी हार के डर से भाजपा अब हिंसा और नफरत का सहारा ले रही है लेकिन बंगाल की जनता ऐसी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देगी जो भाषा और धर्म के नाम पर समाज को बांटना चाहती हैं.

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