श्रावस्ती के गिलौला क्षेत्र में नेहरू स्मारक इंटर कॉलेज के मुख्य द्वार के सामने वर्षों से कूड़े का ढेर जमा है। यह छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। दुर्गंध और गंदगी के कारण विद्यालय का वातावरण प्रभावित हो रहा है, जिससे पढ़ाई-लिखाई पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। शिकायत के बाद कभी-कभार कूड़ा हटा दिया जाता है, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर वैसी ही हो जाती है। स्थानीय निवासी अमित यादव, प्रदीप कुमार, अंकित गुप्ता और जैकी ने बताया कि यह कूड़े का ढेर कई वर्षों से जस का तस पड़ा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब कूड़ा बहकर घरों के सामने और विद्यालय की बाउंड्री के भीतर तक पहुंच जाता है। इससे दुर्गंध फैलती है और विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों और प्रधानाध्यापक को भी इस गंदगी से रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों ने चिंता व्यक्त की है कि विद्यालय के सामने कूड़ा होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कूड़े के इस ढेर को स्थायी रूप से हटाया जाए और वहां डस्टबिन की व्यवस्था की जाए। साथ ही, नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए ताकि दोबारा कूड़ा जमा न हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे संबंधित अधिकारियों से मिलकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उनकी प्रमुख मांगों में कूड़े के ढेर को तत्काल हटाना, स्थायी डस्टबिन की व्यवस्था करना, रोजाना सफाई सुनिश्चित करना और जिम्मेदार विभाग द्वारा निगरानी तय करना शामिल है। स्थानीय लोगों को अब प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है, ताकि विद्यालय और आसपास का क्षेत्र स्वच्छ और सुरक्षित बन सके।
नेहरू कॉलेज के सामने कूड़े का ढेर:छात्र-छात्राएं व स्थानीय निवासी वर्षों से परेशान
श्रावस्ती के गिलौला क्षेत्र में नेहरू स्मारक इंटर कॉलेज के मुख्य द्वार के सामने वर्षों से कूड़े का ढेर जमा है। यह छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। दुर्गंध और गंदगी के कारण विद्यालय का वातावरण प्रभावित हो रहा है, जिससे पढ़ाई-लिखाई पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। शिकायत के बाद कभी-कभार कूड़ा हटा दिया जाता है, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर वैसी ही हो जाती है। स्थानीय निवासी अमित यादव, प्रदीप कुमार, अंकित गुप्ता और जैकी ने बताया कि यह कूड़े का ढेर कई वर्षों से जस का तस पड़ा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब कूड़ा बहकर घरों के सामने और विद्यालय की बाउंड्री के भीतर तक पहुंच जाता है। इससे दुर्गंध फैलती है और विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों और प्रधानाध्यापक को भी इस गंदगी से रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों ने चिंता व्यक्त की है कि विद्यालय के सामने कूड़ा होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कूड़े के इस ढेर को स्थायी रूप से हटाया जाए और वहां डस्टबिन की व्यवस्था की जाए। साथ ही, नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए ताकि दोबारा कूड़ा जमा न हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे संबंधित अधिकारियों से मिलकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उनकी प्रमुख मांगों में कूड़े के ढेर को तत्काल हटाना, स्थायी डस्टबिन की व्यवस्था करना, रोजाना सफाई सुनिश्चित करना और जिम्मेदार विभाग द्वारा निगरानी तय करना शामिल है। स्थानीय लोगों को अब प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है, ताकि विद्यालय और आसपास का क्षेत्र स्वच्छ और सुरक्षित बन सके।






























