साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगने जा रहा है। हालांकि यह खगोलीय घटना भारत में दिखाई नहीं देगी, फिर भी ज्योतिषीय मान्यताओं और धार्मिक दृष्टिकोण से इसे लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है। खगोल विज्ञान के अनुसार यह सूर्य ग्रहण पृथ्वी के कुछ अन्य हिस्सों में आंशिक रूप से दिखाई देगा, लेकिन भारत भौगोलिक स्थिति के कारण इसकी दृश्य सीमा से बाहर रहेगा।
वैज्ञानिकों के मुताबिक सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। 17 फरवरी को लगने वाला यह ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण की श्रेणी में माना जा रहा है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार यह घटना निर्धारित समय पर शुरू होकर कुछ घंटों में समाप्त हो जाएगी। हालांकि भारतीय समयानुसार इसका प्रभाव यहां प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में सूतक काल मान्य नहीं होगा।
इसके बावजूद ज्योतिषाचार्यों और धार्मिक मान्यताओं को मानने वाले लोगों के बीच इस ग्रहण को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ग्रहण से जुड़े राशिफल, उपाय और सावधानियों की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही हैं। कई ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही ग्रहण भारत में दिखाई न दे, लेकिन इसका ज्योतिषीय प्रभाव वैश्विक स्तर पर ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार माना जाता है। विशेष रूप से कुछ राशियों पर इसके प्रभाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण को एक संवेदनशील खगोलीय घटना माना जाता है, जिसका असर मानसिक स्थिति, निर्णय क्षमता और सामाजिक घटनाओं पर पड़ सकता है। हालांकि वैज्ञानिक समुदाय इन दावों को खारिज करता है और इसे केवल एक प्राकृतिक खगोलीय प्रक्रिया मानता है। खगोलविदों का कहना है कि ग्रहण का मानव जीवन पर किसी प्रकार का प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रभाव सिद्ध नहीं है।
धार्मिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य की परंपरा का उल्लेख मिलता है। लेकिन चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां मंदिरों के बंद रहने या विशेष धार्मिक प्रतिबंध लागू होने की संभावना नहीं है। कई मंदिर समितियों ने स्पष्ट किया है कि दृश्यता न होने की स्थिति में सामान्य दिनचर्या जारी रहेगी।
सोशल मीडिया पर ग्रहण को लेकर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक वर्ग इसे खगोलीय जिज्ञासा के रूप में देख रहा है और वैज्ञानिक तथ्यों को साझा कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे ज्योतिषीय और धार्मिक संदर्भों में जोड़कर विभिन्न प्रकार की भविष्यवाणियां कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं के दौरान वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना और प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करना आवश्यक है।
खगोल विज्ञान संस्थानों ने भी लोगों से अपील की है कि ग्रहण को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान न दें। जहां यह ग्रहण दिखाई देगा, वहां लोगों को सुरक्षित तरीके से विशेष सोलर फिल्टर या प्रमाणित उपकरणों का उपयोग कर ही इसे देखने की सलाह दी गई है। बिना सुरक्षा उपकरणों के सूर्य को सीधे देखने से आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।
17 फरवरी का सूर्य ग्रहण भारत में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा, फिर भी यह खगोलीय घटना देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण के बीच बहस जारी है, जबकि आम लोग इसे लेकर उत्सुकता और जिज्ञासा दिखा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ग्रहण से जुड़ी चर्चाएं किस दिशा में आगे बढ़ती हैं, लेकिन फिलहाल भारत में जनजीवन सामान्य रूप से चलता रहेगा।





















