होली के पावन अवसर पर अपनाएं ये पारंपरिक उपाय, दूर होंगी बाधाएं और बढ़ेगी सुख-समृद्धि

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रंगों और उमंगों का पर्व होली केवल उत्सव का प्रतीक ही नहीं, बल्कि आस्था और परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है. विशेष रूप से होलिका दहन को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा-अर्चना और पारंपरिक उपाय जीवन की कई समस्याओं को दूर करने में सहायक सिद्ध होते हैं. 

यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमार चल रहा हो और दवाइयों के बावजूद स्वास्थ्य में सुधार न हो रहा हो, तो होलिका दहन के समय देशी घी में दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता रखकर अग्नि में अर्पित करें. अगले दिन होली की राख रोगी के शरीर पर लगाकर उसे गुनगुने जल से स्नान कराएं. मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य लाभ मिलता है.

यदि किसी व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा, अभिचार या तांत्रिक प्रभाव का संदेह हो, तो होलिका दहन की राख शरीर पर लगाकर गर्म पानी से स्नान करने की परंपरा बताई गई है. ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव समाप्त होने की मान्यता है.

यदि पति-पत्नी के संबंधों में दूरी आ गई हो और पति किसी अन्य महिला के संपर्क में हो, तो होलिका दहन के समय ऊपर बताई गई सामग्री अग्नि में अर्पित करें तथा सात परिक्रमा करें. परिक्रमा करते समय एक गोमती चक्र पति का नाम लेकर अग्नि में समर्पित करें. लोकविश्वास है कि इससे दांपत्य संबंध सुधरते हैं.

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यदि किसी पर तांत्रिक प्रयोग का संदेह हो, तो होलिका दहन के समय देशी घी, दो लौंग, एक बताशा, एक पान का पत्ता और थोड़ी मिश्री अग्नि में अर्पित करें. अगले दिन राख को चांदी के ताबीज में भरकर गले में धारण करने की परंपरा है, जिससे नकारात्मक प्रभाव दूर होने की मान्यता है.

यदि किसी ने उधार लिया धन वापस न किया हो, तो होली जलने वाले स्थान पर अनार की लकड़ी से उसका नाम लिखकर होलिका माता से धन वापसी की प्रार्थना करें और हरा गुलाल अर्पित करें. विश्वास है कि इससे धन प्राप्ति में सहायता मिलती है.

यदि किसी से शत्रुता समाप्त करनी हो, तो होलिका दहन के अगले दिन रात में उसी स्थान पर जाकर अनार की लकड़ी से उसका नाम लिखें और बाएं हाथ से मिटा दें. वहां की थोड़ी राख लाकर अगले दिन उस व्यक्ति के सिर पर डालने की परंपरा बताई जाती है, जिससे वैमनस्य कम होता है.

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यदि जन्मपत्री में ग्रह दोष हो, तो होलिका दहन के समय देशी घी, दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अग्नि में अर्पित करें. अगले दिन राख को शुद्ध कर बहते जल में प्रवाहित करने की मान्यता है, जिससे ग्रह शांति होती है.

यदि राज्य पक्ष से बाधा आ रही हो, तो होलिका की उल्टी परिक्रमा करने और प्रत्येक फेरे के बाद आक की जड़ अग्नि में अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है. लोकमान्यता है कि इससे प्रशासनिक अड़चनें दूर होती हैं.

वास्तुदोष निवारण के लिए होलिका दहन के अगले दिन अपने इष्ट देव को गुलाल अर्पित करें और घर के ईशान कोण में पूजा कर गुलाल चढ़ाएं. माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

यदि किसी व्यक्ति पर भय या नकारात्मक प्रभाव का साया हो, तो होली के दिन एक नारियल, एक जोड़ा लौंग और पीली सरसों लेकर पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से 21 बार उतारकर होलिका अग्नि में अर्पित करें. विश्वास है कि इससे दुष्प्रभाव समाप्त होता है.

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बार-बार आर्थिक हानि हो रही हो तो होलिका दहन की शाम मुख्य द्वार की चौखट पर दोमुखी आटे का दीपक बनाकर उसमें दीप प्रज्वलित करें. चौखट पर थोड़ा गुलाल छिड़ककर आर्थिक समृद्धि की प्रार्थना करें. यह उपाय धन हानि से बचाव के लिए किया जाता है.

यदि किसी बच्चे या बड़े को जल्दी नजर लग जाती हो, तो होलिका दहन के समय देशी घी, दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अग्नि में अर्पित करें. अगले दिन राख को तांबे या चांदी के ताबीज में भरकर काले धागे में बांधकर गले में धारण करने की परंपरा है, जिससे नजर दोष से रक्षा होने की मान्यता है.

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