दक्षिण भारतीय ‘मोरकली’: सादगी में छुपा स्वाद, सेहत और परंपरा का अनोखा संगम

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दक्षिण भारत की पारंपरिक रसोई से निकली ‘मोरकली’ आज फिर से चर्चा में है. चावल के आटे और खट्टे छाछ से तैयार होने वाला यह हल्का और सुपाच्य व्यंजन तमिलनाडु का लोकप्रिय कंफर्ट फूड माना जाता है. सादे मसालों और तड़के के साथ बनने वाली मोरकली न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि पेट के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. पारंपरिक स्वाद और घरेलू सुकून का अहसास दिलाने वाली यह डिश आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भी लोगों की पसंद बनी हुई है.

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सामग्री
1 कप चावल का आटा

2 कप खट्टा छाछ (मठा)

1 कप पानी

2–3 हरी मिर्च (बारीक कटी)

1 छोटा टुकड़ा अदरक (कद्दूकस किया हुआ)

1/2 चम्मच राई

1/2 चम्मच उड़द दाल

1/2 चम्मच चना दाल

8–10 करी पत्ते

2 सूखी लाल मिर्च

1 चुटकी हींग

2–3 बड़े चम्मच तेल

स्वादानुसार नमक

बनाने की विधि
घोल तैयार करें:
एक बाउल में चावल का आटा, छाछ, पानी और नमक मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें ताकि गुठलियां न रहें.

तड़का लगाएं:
कढ़ाही में तेल गरम करें. उसमें राई डालें. राई चटकने लगे तो उड़द दाल, चना दाल डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें.
अब हींग, सूखी लाल मिर्च, करी पत्ते, हरी मिर्च और अदरक डालें.

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घोल पकाएं:
तैयार किया हुआ छाछ-चावल का घोल कढ़ाही में डालें और लगातार चलाते रहें.
मध्यम आंच पर 8–10 मिनट तक पकाएं जब तक मिश्रण गाढ़ा होकर कढ़ाही छोड़ने न लगे.

सेट करें:
एक प्लेट या ट्रे को हल्का तेल लगाकर चिकना करें. उसमें तैयार मिश्रण फैलाकर 10–15 मिनट के लिए ठंडा होने दें.

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सर्व करें:
सेट होने के बाद इसे चौकोर टुकड़ों में काट लें. ऊपर से थोड़ा तड़का डालकर गर्मागर्म परोसें.

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