ईसी तुगलकी आयोग बन गया, ममता बनर्जी का आरोप बंगाल में 58 लाख वोटर हटाए गए

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि आयोग एक “तुगलकी आयोग” की तरह काम कर रहा है और उस पर एक राजनीतिक दल का प्रभाव है. कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि राज्य में 58 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं.

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से की गई और इसमें कथित तौर पर भाजपा से जुड़े आईटी सेल की महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका रही. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भी अनदेखी कर रहा है और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के नाम पर मतदाताओं के अधिकारों का हनन किया जा रहा है.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन प्रक्रिया से राज्य में व्यापक चिंता का माहौल बना है. उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया से उत्पन्न तनाव और कार्य दबाव के कारण 160 लोगों की जान चली गई. हालांकि इन दावों पर चुनाव आयोग की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की कार्रवाई भाजपा के निर्देश पर की जा रही है. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए कहा कि आम नागरिकों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है. उन्होंने प्रक्रिया में “तार्किक विसंगतियों” का हवाला देते हुए पारदर्शिता की मांग की.

मुख्यमंत्री ने राज्य के अधिकारियों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग द्वारा राज्य सरकार के किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो पश्चिम बंगाल सरकार उन्हें “100 प्रतिशत संरक्षण” देगी. उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी को आयोग द्वारा पदावनत किया गया, तो राज्य सरकार उसे पदोन्नत करेगी.

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ममता बनर्जी ने दावा किया कि बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है ताकि एक विशेष राजनीतिक दल को संतुष्ट किया जा सके. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसी भी ऐसे कदम का विरोध करेगी जो नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करता हो.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है. चुनाव आयोग आम तौर पर चुनाव से पहले मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए विशेष अभियान चलाता है, लेकिन इस बार बंगाल में यह प्रक्रिया राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है.

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अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है और क्या इस मामले में कोई स्पष्टीकरण या जांच की घोषणा की जाती है। फिलहाल राज्य की सियासत में यह मुद्दा गर्माता जा रहा है और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक असर और गहरा हो सकता है।

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