रोज एक चम्मच सफेद तिल सेहत के लिए वरदान, वजन घटाने से दिल और हड्डियों तक मिलते हैं जबरदस्त फायदे

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बदलती जीवनशैली और भागदौड़ भरे दौर में लोग सेहतमंद रहने के लिए प्राकृतिक और पौष्टिक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में भारतीय रसोई में सदियों से इस्तेमाल हो रहा छोटा सा बीज सफेद तिल एक बार फिर चर्चा में है। आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों ही सफेद तिल को स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना सिर्फ एक चम्मच सफेद तिल को डाइट में शामिल करने से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और कई आम स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव संभव है।

सफेद तिल में कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, जिंक, फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स जैसे अहम पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाने की सलाह दी जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, सफेद तिल का नियमित सेवन वजन कंट्रोल करने में भी मददगार हो सकता है। इसमें मौजूद फाइबर और प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग की आदत पर नियंत्रण रहता है। वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह एक आसान और प्राकृतिक उपाय माना जा रहा है।

हड्डियों की मजबूती के लिए भी सफेद तिल को बेहद फायदेमंद बताया गया है। कैल्शियम से भरपूर होने के कारण यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और बढ़ती उम्र में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि खासतौर पर महिलाओं और बुजुर्गों को अपने आहार में कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए, जिसमें सफेद तिल एक अच्छा विकल्प है। नियमित सेवन से जोड़ों के दर्द में भी राहत मिल सकती है।

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त्वचा और बालों की सेहत के लिए भी सफेद तिल लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन ई त्वचा को पोषण देने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह त्वचा की नमी बनाए रखने, झुर्रियों को कम करने और समय से पहले होने वाली एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक हो सकता है। बालों के लिए भी तिल और तिल का तेल फायदेमंद बताया गया है। यह बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है और झड़ने की समस्या को कम करने में मदद करता है।

पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी सफेद तिल अहम भूमिका निभा सकता है। फाइबर से भरपूर होने के कारण यह कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में सहायक है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना सीमित मात्रा में तिल का सेवन पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस और अपच को कम करने में मदद करता है। स्वस्थ पाचन तंत्र पूरे शरीर की सेहत के लिए जरूरी माना जाता है।

दिल की सेहत को लेकर भी सफेद तिल को सकारात्मक माना जा रहा है। इसमें पाए जाने वाले हेल्दी फैट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक हो सकते हैं। इससे हार्ट डिजीज का खतरा कम हो सकता है। पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ सफेद तिल का सेवन हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में योगदान दे सकता है। यह ब्लड सर्कुलेशन को भी बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है।

शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में भी सफेद तिल की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है। इसमें मौजूद आयरन, मैग्नीशियम और प्रोटीन शरीर की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करते हैं। जो लोग अक्सर थकान और कमजोरी महसूस करते हैं, उनके लिए सीमित मात्रा में तिल का सेवन लाभकारी हो सकता है। नियमित सेवन से स्टैमिना में सुधार देखा जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी नई चीज को डाइट में शामिल करने से पहले व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।

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डायबिटीज के मरीजों के लिए भी सफेद तिल को उपयोगी माना जाता है। इसमें पाया जाने वाला मैग्नीशियम ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। कुछ शोधों में यह संकेत मिले हैं कि तिल का सेवन इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि यह किसी भी दवा का विकल्प नहीं है, बल्कि संतुलित आहार का एक हिस्सा हो सकता है। डायबिटीज मरीजों को अपने डॉक्टर की सलाह से ही इसे नियमित रूप से लेना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी सफेद तिल के सकारात्मक प्रभाव की बात कही जा रही है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम और ट्रिप्टोफैन दिमाग को शांत रखने में मदद कर सकते हैं। तनाव और अनिद्रा की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह लाभकारी हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए संतुलित जीवनशैली, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।

आयुर्वेद में सफेद तिल को शरीर को गर्म रखने वाला और ताकत देने वाला माना गया है। सर्दियों के मौसम में इसका उपयोग अधिक किया जाता है, लेकिन सीमित मात्रा में इसे सालभर खाया जा सकता है। तिल को भूनकर, चटनी में मिलाकर, सलाद पर छिड़ककर या लड्डू और अन्य पारंपरिक व्यंजनों में शामिल कर सेवन किया जा सकता है। रोजाना एक चम्मच तिल पर्याप्त माना जाता है।

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हालांकि, विशेषज्ञ सावधानी भी बरतने की सलाह देते हैं। तिल में कैलोरी की मात्रा भी होती है, इसलिए अधिक मात्रा में सेवन वजन बढ़ाने का कारण बन सकता है। जिन लोगों को तिल से एलर्जी है, उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को अपने चिकित्सक की सलाह के बाद ही इसे नियमित रूप से डाइट में शामिल करना चाहिए।

कुल मिलाकर सफेद तिल एक छोटा लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर बीज है, जो वजन कंट्रोल, हड्डियों की मजबूती, पाचन सुधार, दिल की सेहत, ऊर्जा बढ़ाने और त्वचा व बालों की देखभाल में सहायक माना जाता है। बदलती जीवनशैली के बीच प्राकृतिक और संतुलित आहार की ओर लौटने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है और इसी कड़ी में सफेद तिल एक आसान, सुलभ और पारंपरिक विकल्प के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इसका सेवन किया जाए तो यह बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक छोटा लेकिन प्रभावी कदम साबित हो सकता है।

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