श्रावस्ती जिले के सिरसिया विकासखंड क्षेत्र में नीलगायों के कारण फसलों को हो रहे नुकसान की समस्या लगातार बढ़ रही है। क्षेत्र के किसानों ने बताया है कि नीलगाय अब दिन और रात दोनों समय खेतों में घुसकर गेहूं, सरसों और मटर जैसी खड़ी फसलों को बर्बाद कर रही हैं। किसान रंजीत, सीषू शर्मा, विनोद शर्मा, अनील दूबे, बडकऊ और विशाल ने जानकारी दी कि नीलगायों के झुंड अचानक खेतों में प्रवेश कर जाते हैं। सामान्य तारबंदी भी उन्हें रोकने में अप्रभावी साबित हो रही है। खेत में घुसते ही वे तेजी से फसलों को रौंद देती हैं, जिससे कुछ ही समय में बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाता है। किसानों के अनुसार, छुट्टा मवेशी भी अलग-अलग समूहों में खेतों तक पहुंचकर नुकसान को बढ़ा रहे हैं। किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए दिन-रात खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इसके बावजूद, मौका मिलते ही नीलगाय झुंड बनाकर खेतों में घुस जाती हैं और उनकी मेहनत को बर्बाद कर देती हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें हर सीजन में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव बढ़ रहा है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नीलगायों और छुट्टा मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका उद्देश्य है कि उनकी खेती सुरक्षित रह सके और उन्हें इस समस्या से राहत मिल सके।
सिरसिया में नीलगायों से फसलें नष्ट:किसान दिन-रात रखवाली के बावजूद भारी नुकसान झेल रहे
श्रावस्ती जिले के सिरसिया विकासखंड क्षेत्र में नीलगायों के कारण फसलों को हो रहे नुकसान की समस्या लगातार बढ़ रही है। क्षेत्र के किसानों ने बताया है कि नीलगाय अब दिन और रात दोनों समय खेतों में घुसकर गेहूं, सरसों और मटर जैसी खड़ी फसलों को बर्बाद कर रही हैं। किसान रंजीत, सीषू शर्मा, विनोद शर्मा, अनील दूबे, बडकऊ और विशाल ने जानकारी दी कि नीलगायों के झुंड अचानक खेतों में प्रवेश कर जाते हैं। सामान्य तारबंदी भी उन्हें रोकने में अप्रभावी साबित हो रही है। खेत में घुसते ही वे तेजी से फसलों को रौंद देती हैं, जिससे कुछ ही समय में बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाता है। किसानों के अनुसार, छुट्टा मवेशी भी अलग-अलग समूहों में खेतों तक पहुंचकर नुकसान को बढ़ा रहे हैं। किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए दिन-रात खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इसके बावजूद, मौका मिलते ही नीलगाय झुंड बनाकर खेतों में घुस जाती हैं और उनकी मेहनत को बर्बाद कर देती हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें हर सीजन में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव बढ़ रहा है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नीलगायों और छुट्टा मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका उद्देश्य है कि उनकी खेती सुरक्षित रह सके और उन्हें इस समस्या से राहत मिल सके।





























